बारिश शुरू होते ही जिले में मलेरिया ने दस्तक दे दी है। सरकारी अस्पताल में ही इसके अब तक 40 से अधिक मामले आ चुके है। निजी अस्पतालों में सैकड़ों मरीज इलाज करा रहे हैं। मलेरिया का सबसे ज्यादा प्रकोप बापौली खंड में है। यहां से करीब 30 मरीज सरकारी अस्पताल पहुंच चुके हैं। एकदम से मलेरिया के इतने केस आने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है।
मानसून शुरू होते ही जिले में डायरिया के बाद मलेरिया ने भी जबरदस्त दस्तक दी है। सिविल अस्पताल में मलेरिया के अब तक 40 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। हालात खराब होने के कारण अधिकारियों ने मलेरिया विभाग की दो टीमों को बापौली क्षेत्र में तैनात कर दिया है। टीमें लोगों के घरों को चेक कर क्षेत्र में फोगिंग भी कर रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने अब तक शहर में फोगिंग नहीं की है। एकदम से बड़ी संख्या में मलेरिया के मरीज आने से सिविल अस्पताल में बेड भी नहीं मिल रहे, क्योंकि अधिकांश बेड पर डायरिया के मरीज हैं।
इमरजेंसी में नहीं कुनैन
मलेरिया के केस सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की पोल खुल गई है। मलेरिया के मरीजों को दी जाने वाली कुनैन तक सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में नहीं हैं। ऐसे में मलेरिया के मरीजों केवल बुखार उतारने की दवाएं दी जा रही हैं।
पहले गांव में देते थे दवा, अब बदला समय
स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि मलेरिया से बचने के लिए कुनैन की गोलियां महत्वपूर्ण होती हैं। दस साले पहले स्वास्थ्य विभाग की मलेरिया विंग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर यह दवा दिया करते थे। क्लोरिन की गोलियां पीने के पानी में डाली जाती थीं। इससे मलेरिया की रोकथाम आसानी से हो जाती थी। अब स्वास्थ्य विभाग की नीतियां भी बदल गई हैं।
बापौली से आ रहे हर रोज दो मरीज
यमुना नदी से सटे बापौली क्षेत्र से मलेरिया के 30 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। यमुना नदी पास होने के कारण बापौली में मच्छरों की भरमार है। क्षेत्र के गांवों में भी गंदगी है। यही कारण है कि बापौली मलेरिया और डेंगू का गढ़ बना जाता है। बापौली क्षेत्र से हर रोज मलेरिया के औसतन दो मामले सामने आ रहे हैं।
शहर की कॉलोनियों में गंदगी के ढेर
शहर में नगर निगम ने सफाई पर ध्यान नहीं दिया है। तहसील कैंप, विष्णु कॉलोनी, वधावाराम कॉलोनी, विद्यानंद कॉलोनी, कुटानी रोड, दलबीर नगर, डाबर कॉलोनी, पहलवान चौक, मॉडल टाउन, जवाहर नगर, खटीक बस्ती, कृष्ण नगर, दत्ता कॉलोनी में गंदगी की भरमार है। यहां की नालियां गंदगी से लबालब है। लोगों का घरों से निकला दूभर है।
कई बार लगा चुके अधिकारियों से गुहार
शहर की बाहरी कॉलोनी के दर्जनों लोग सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके है। लोगों का आरोप है कि गंदगी के कारण लोग मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं। इसके बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
मलेरिया के लक्षण
-बुखार साथ तेज ठंड लगना
-हर 12 घंटे के बाद बुखार आना
-बुखार अधिकतर दो घंटे तक रहना
-ठंड लगने के बाद पसीना आना
मलेरिया के उपाय
डॉ. अमित दहिया ने बताया कि मलेरिया का अगर समय पर उपचार न हो तो यह सीधा ब्रेन पर असर डालता है। इससे मरीज की जान भी जा सकती है। मलेरिया से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करे। पूरे कपड़े पहनकर रहे। आसपास गंदगी न होने दें। बुखार आते ही अच्छे चिकित्सक को दिखाएं।
मानसून आने के कारण मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे है। मलेरिया और डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। बापौली में घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। लोगों को मलेरिया और डेंगू के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शहर की बाहरी कॉलोनियों और बापौली में फॉगिंग की जा रही है।
डॉ. इंद्रजीत सिंह धनखड़, सीएमओ पानीपत।