अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। चैत्र नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की गई। पूजन के बाद लोगों ने अपने घरों में कंजकाें को भोजन करा कर व्रत खोला। इस दौरान भक्तों ने मां से सुख-शांति रहने की कामना की।
गीता मंदिर के पंडित विष्णु दत्त आचार्य ने बताया कि आठ साल पहले अष्टमी और नवमी आपस में जुड़े थे। इस बार फिर से यह योग बना है। अष्टमी के दिन ही नवमी शुरू हो रही है। आमतौर पर यह दोनों अलग-अलग होती हैं। मंगलवार को अष्टमी सुबह करीब 11:05 बजकर खत्म होगी। इसके तुरंत बाद नवमी शुरू हो जाएगी। यह बुधवार को दस बजे तक ही रहेगी। इसके बीच में ही कन्याओं को भोजन कराना उत्तम रहेगा।
देवी महागौरी की कथा
देवी पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती को देखकर कुछ कह दिया। इससे देवी का मन आहत हो गया। इसके बाद मां पार्वती तपस्या में लीन हो गईं। कई प्रकार वर्षों तक कठोर तपस्या करती रहीं। भगवान शिव उन्हें खोजते हुए उनके पास पहुंचे। वहां पार्वती को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं। पार्वती का रंग अत्यंत ओजपूर्ण हो गया होता है। उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुंद के फूल के समान धवल हो जाती है। उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौरवर्ण का वरदान देते हैं।
भक्तों ने की देवी महागौरी की पूजा
भक्तों ने विधि विधान से देवी महागौरी का पूजन कर कन्याओं को भोजन कराया। इस दौरान भक्तें ने देवी से परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की कामना की। जिले के अधिकतर परिवारों ने नवमी शुरू होने यानी करीब 11:05 मिनट के बाद ही कन्याओं को भोजन कराया।
देवी महागौरी का स्वरूप
देवी महागौरी की चार भुजाएं हैं। उनकी दायीं भुजा अभय मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में त्रिशूल है। बायीं भुजा में डमरू है। देवी गौरी भक्तों की प्रार्थना सुनकर वरदान देती हैं। माना जाता है कि जो स्त्री देवी के स्वरूप की पूजा भक्ति भाव से करती है, उसके सुहाग की रक्षा देवी स्वयं करती हैं। कुंवारी लड़की मां के इस रूप की पूजा करती हैं तो उसे योग्य पति प्राप्त होता है। देवी गौरी की पूजा यदि पुरुष करते हैं, उनका जीवन सुखमय रहता है। देवी उनके पापों को जला देती हैं।
आज होगी देवी सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्र के नौवें दिन मां के नौंवे स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली है। इस लिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। कहा जाता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से रुके हुए हर काम पूरे होते हैं और हर काम में सिद्धि मिलती है।