फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: खेती के तरीके बदलकर बनाई पहचान, आज मिलेगा सम्मान

Sun, 21 Sep 2025 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
विज्ञापन
पलड़ी गांव की किसान सुमन अपने पति पोरस के साथ। स्रोत : स्वयं
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

पानीपत। खेती करने के तरीके में बदलाव कर प्रगतिशील किसान इसे फायदेमंद बना रहे हैं। वे इससे उत्पादन ही अधिक नहीं ले रहे बल्कि खाद का भी कम प्रयोग कर रहे हैं। जिले के हथवाला गांव के किसान नीरज त्यागी और पलड़ी गांव की महिला किसान सुमन ने जिला ही नहीं प्रदेश में अलग पहचान बनाई है।
दोनों किसानों को कृषि विश्वविद्यालय हिसार में प्रदेश स्तरीय किसान मेले में सम्मानित किया जाएगा। नीरज त्यागी को सब्जी की खेती के माध्यम से फसल विविधिकरण में सम्मानित किया जाएगा। वहीं सुमन को संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकी में सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन


कोट्स फोटो
परंपरागत खेती को कम कर सब्जी को अपनाया
हथवाला के 52 वर्षीय किसान नीरज त्यागी परंपरागत खेती को कम कर सब्जी की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। नीरज त्यागी ने बताया कि वे 10वीं पास हैं और 15 एकड़ में खेती करते हैं। पहले धान और गेहूं की खेती करते थे। उनके मन में खेती में कुछ अलग करने का विचार आता रहता था। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालय जाना शुरू किया। उनको कृषि के आधुनिक तरीके के साथ सब्जी की खेती करने का फैसला लिया।
उन्होंने धान व गेहूं के साथ सब्जी, मशरुम, हल्दी की खेती शुरू कर दी। वे दूसरे किसानों से हटकर सब्जी की किस्म लेकर आते हैं। दूसरे किसान गोभी लगाते हैं तो वह ब्रोकली और रंग बिरंगी गोभी लगाते हैं। हर बार चार या पांच एकड़ में सब्जी करते हैं। दो एकड़ में बाग है। इसमें अमरूद, आम, नाशपाती व आडू की खेती की जाती है। उनके साथ उनके बेटे भानू त्यागी भी खेती में हाथ बंटाते हैं। उनको अब किसी से रोजगार मांगने की जरूरत नहीं है। वे 8-10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
जेबीटी सुमन ने छोड़ी नौकरी
पलड़ी गांव की सुमन एमए और जेबीटी हैं। उन्होंने किसी प्राइवेट स्कूल में नौकरी करने के बजाय अपने खेत में आधुनिक तरीके से खेती शुरू की। सुमन के पति पोरस एमए और बीएड हैं। वे पहले एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी करते थे। उन्होंने भी स्कूल में शिक्षक की नौकरी छोड़ दी। सुमन ने बताया कि उनके पास खुद की 60 एकड़ जमीन है। वे 33 एकड़ में गन्ने और 11 एकड़ में धान की सीधी बिजाई करते हैं। पति पोरस के बाहर जाने पर अपने खेत को खुद संभाल लेती हैं।
विज्ञापन

धान की सीधी बिजाई कर 4500 रुपये धान रोपाई की बचत होती है और 4500 रुपये की सरकार की तरफ से मिलते हैं। जबकि 1200 रुपये में डीएसआर विधि से धान की बिजाई कर देते हैं। इससे पानी की भी बचत होती है। वे पानी की बचत के लिए ही धान की सीधी बिजाई करते हैं। वहीं गन्ने के पत्ते को जलाने की बजाय मल्चर मशीन से कटाई कर खेत में ही डाल देते हैं। इससे गन्ने में खरपतवार नहीं होता और नमी बनी रहती है। सामान्य विधि से प्रति एकड़ 400 क्विंटल गन्ना उत्पादन होता है और खरपवार निकालने में अलग से खर्च करना पड़ता है। जबकि उनके खेत में प्रति एकड़ 450 से 500 क्विंटल गन्ना निकलता है।

पलड़ी गांव की किसान सुमन अपने पति पोरस के साथ। स्रोत : स्वयं

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें