पानीपत। टेक्सटाइल नगरी की हवा जहरीली होती जा रही है। यहां चल रहे 20 हजार उद्योग और गुजरने वाले एक लाख से अधिक वाहनों का धुआं प्रदूषण के मुख्य कारक हैं। प्रदूषण के कारण टेक्सटाइल नगरी में कैंसर के मरीज भी बढ़ रहे हैं। इस वक्त जिले में पांच हजार से अधिक कैंसर के मरीज हैं। प्रदूषण के कारण यहां सबसे अधिक खतरा फेफड़ों की कैंसर का है। इसके अलावा मुंह के कैंसर के सबसे अधिक मरीज हैं। इसका मुख्य कारण धूम्रपान है। इसके अलावा महिलाओं में यूट्रस कैंसर और स्तन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं।
बताते चलें कि पानीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्तूबर से जनवरी तक ऑरेंज व रेड जोन में रहता है। इसमें हवा इतनी प्रदूषित होती है कि हर व्यक्ति पैसिव स्मोकिंग करता है। विशेषज्ञों के अनुसार हर व्यक्ति के अंदर 10 सिगरेट के बराबर धुआं जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, लोगों में कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी ज्यादातर मामलों में जानलेवा साबित हो रही है लेकिन समय रहते कैंसर रोगियों की जान बचाई जा सकती है। दूसरी ओर जिले के कैंसर रोगियों को इलाज के लिए पीजीआई और दिल्ली के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्ष के दौरान जिले में कैंसर के 750 से अधिक केस आए हैं। इनके अलावा बहुत से मरीज निजी अस्पतालों में कैंसर का इलाज करवा रहे हैं। स्थिति यह है कि पानीपत में कैंसर की प्रारंभिक जांच की सुविधा तक नहीं है। ऐसे में कैंसर की शंका होने पर मरीजों को रोहतक पीजीआई, चंडीगढ़ पीजीआई या दिल्ली के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के पास लगभग 600 कैंसर रोगी ही पंजीकृत हैं।
डाॅ. प्रेम कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिनव ने बताया कि पानीपत में कैंसर बढ़ने का बड़ा कारण बढ़ता प्रदूषण स्तर है। उन्होंने बताया कि उनके यहां अस्पताल में हर माह करीब 50 सर्जरी हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर बड़ी परेशानी बन रहा है। अब तक वह करीब ढाई हजार रेडियो थेरेपी कर चुके हैं। उनके अनुसार वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, क्योंकि पानीपत की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है।
फ्री बस पास नहीं लिया तो कैंसर मरीजों में गिनती नहीं
रोहतक पीजीआई में कैंसर की पुष्टि होने के बाद यदि कोई मरीज जिला नागरिक अस्पताल से फ्री बस पास की पर्ची नहीं लेता तो उसकी गिनती पानीपत के कैंसर मरीजों में नहीं की जाती है। ऐसे मरीजों का आंकड़ा रोहतक पीजीआई में ही दर्ज किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उद्योग नगरी पानीपत में दूसरे प्रदेशों के लोगों की संख्या अधिक है। इनमें मुंह के कैंसर के मामले सर्वाधिक हैं।