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प्रेम किसी बाजार में नहीं मिलता : निरंजन पाराशर

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पानीपत। श्री प्रेम मंदिर में आयोजित 105वां प्रेम सम्मेलन बुधवार को सत्संग के साथ संपन्न हो गया। इसके साथ हनुमान चालीसा और रामचरितमानस का पाठ किया। गंगाधाम मंदिर के मुख्य पुजारी निरंजन पाराशर ने कहा कि प्रेम किसी बाजार में नहीं मिलता। वह तो ढूंढना पड़ता है।
यहां तक की भरत जब राम को मिलने चित्रकूट जा रहे थे तो वे भी पूछते हैं कि बता दे कोई कहां मिलेंगे राम, प्रेम की उत्पत्ति अंतर्मन में होती है। इसको प्राप्त करने के लिए पहले परमात्मा का नाम जप, शास्त्र का पठन व यज्ञ-पूजन आदि करना होता है। ये सब प्रेम पथ पर जाने के साधन हैं।
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राधेश्याम रामायणी ने बताया कि प्रेम हरि का रूप है। प्रेम व परमात्मा एक ही हैं, परमात्मा के अतिरिक्त त्रिलोकी में कष्ट दूर करने वाला कोई नहीं। जब माता सीता अशोक वाटिका में थीं तो इससे बढ़कर दुनिया में कोई दुख नहीं है। वह भी तब ही दूर हुआ जब उनको राम मिले। शिव जब माता पार्वती को कथा सुना चुके तब उन्होंने कहा कि कथा का बहुत ही आनंद आया। उनसे उनके अनुभव का पूछा तो शिव ने एक लाइन में कहा उमा कहऊं मैं अनुभव अपना। सत हरि भजन जगत सब सपना।
ब्रह्मर्षि महाराज ने कहा कि भगवान की सेवा, पूजा चाहे न करो परंतु भगवान से डरो जरूर। रामहि केवल प्रेम पियारा जान लेहु जो जाननहारा। आज मनुष्य के पास सब कुछ है परंतु यदि कमी है तो केवल समय की। वह यहां तक कहने में भी नहीं हिचकता कि यदि भगवान को आना है तो हमारी सुविधानुसार आकर मिले। सम्मेलन की अध्यक्षता हरमिलाप मिशन हरिद्वार के परमाध्यक्ष 108 मदनमोहन हरमिलापी और प्रेम मंदिर की परमाध्यक्षा कांता देवी के संयुक्त रूप से की।
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सम्मेलन के समापन सत्र में हलद्वानी, हापुड़, वदोदरा, बरेली, मुक्तसर, दिल्ली, झज्जर, कैथल, बहादुरगढ़, करनाल तथा देश के अन्य स्थानों से भक्त पहुंचे। सम्मेलन में आरती मंडल असंध रोड शिवपुरी पानीपत और राधा रमण मंदिर विराट नगर पानीपत की संस्थाओं ने विशेष सहयोग दिया। इस मौके पर परमवीर धींगड़ा, चरनजीत रत्रा, अनिल नंदवानी, सुरेश अरोड़ा, सचिन मिगलानी, सौरभ दुआ, मदनलाल व बलदेव राज मौजूद रहे।
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