जैन स्थानक में प्रवचन करते उपेंद्र मुनि। संवाद
समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने विषयों से अलगाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विषयों से विरक्ति का अर्थ है कि किसी वस्तु या विषय में रुचि का न रहना और यह प्राप्त करना मुश्किल है। क्योंकि मनुष्य स्वाभाविक रूप से किसी न किसी चीज़ में संलग्न या अनुरक्त होता है। विषयों में रुचि और लगाव मानव स्वभाव का एक हिस्सा है और इस अलगाव की स्थिति तक पहुंचना मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास की मांग करता है। किसी भी चीज से अरुचि या मोह का कम हो जाना विरक्ति है। मनुष्य अपने जीवन में किसी न किसी चीज से स्वाभाविक रूप से जुड़ा होता है। चाहे वह सुख-सुविधा हो या कोई और लक्ष्य। इस जुड़ाव से मुक्त होकर केवल विषयों से विरक्ति पाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। किसी वस्तु, व्यक्ति या भावना के प्रति आसक्ति या लगाव न होना। जो विरक्त होता है, वह सांसारिक सुखों या बंधनों से दूर रहता है और उसमें किसी चीज के प्रति रुचि या चाहत नहीं होती। इसे वैराग्य या उदासीनता भी कहते हैं किसी व्यक्ति के विवाहित जीवन से विरक्ति होने का मतलब है कि उसने उस जीवन से मोह त्याग दिया था।