समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने बुधवार को प्रवचन में कहा कि व्यक्ति को कीचड़ में कमल की तरह रहना चाहिए। कठिन और नकारात्मक परिस्थितियों में भी अपनी आंतरिक सुंदरता, पवित्रता और सकारात्मकता बनाए रखना चाहिए। उनसे अप्रभावित रहकर खिलना और दूसरों के लिए प्रेरणा बनना। यह दर्शाता है कि बाहरी वातावरण गंदा या चुनौतीपूर्ण हो सकता है लेकिन हम अपनी आंतरिक शक्ति से इन कठिनाइयों से ऊपर उठ सकते हैं और अपनी आत्मा को विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे कमल का फूल कीचड़ भरे पानी से ऊपर उठकर खिलता है। वैसे ही मनुष्य भी जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों से आगे बढ़कर आत्म-विकास कर सकता है। जैसे कीचड़ में पनपने के बावजूद कमल अपनी सुंदरता और पवित्रता नहीं खोता। इसी तरह, व्यक्ति को भी आसपास के नकारात्मक वातावरण से प्रभावित हुए बिना अपनी आंतरिक अच्छाई और शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। कमल का तना लचीलेपन का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि हमें जीवन में कितना भी विपरीत अनुभव हो, हमें हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। इस मौके पर एसएस जैन सभा के प्रधान वीर प्रकाश जैन, महासचिव अनुराग जैन, पवन जैन, राकेश जैन, अमित जैन, राजेंद्र जैन व गौरव जैन मौजूद रहे।