अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। खाटू श्याम परिवार द्वारा रविवार को देवी मंदिर के प्रांगण में 11वां श्याम वंदना महोत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि के रूप में जगदीश जैन पहुंचे और ओमप्रकाश सिंगला पहुंचे। ग्वालियर से आए मनोज शर्मा के भजन ऐ नैनन में श्याम समाय गयो, मोहे प्रेम का रोग लगाय गयो पर श्रद्धालु झूमने लगे। वहीं गायक कुमार दीपक कोलकाता से, सुश्री रेशमी शर्मा पटना से, सौरभ शर्मा इंदौर से और पानीपत की शान आशू वर्मा ने अपनी मधुर वाणी से बाबा श्री श्याम जी को भजनों के माध्यम से गुणगान किया। दिल्ली से आए श्याम बाबा के दरबार का श्रृंगार कलकत्ता से मंगाई गई सामग्री के द्वारा किया गया। इस दौरान भक्तों के लिए चार विशेष लकी ड्रा भी निकाले गए। जिसमें लड्डू गोपाल उपहार रूप में प्रदान किए गए। स्वामी मुक्तानंद महाराज ने बताया कि खाटू श्याम बाबा का फाल्गुन मेला अपने अद्भुत भक्तिमय स्वरूप पूरे विश्व में विख्यात है। सीकर के खाटू मंदिर में पांडव महाबली भीम के पौत्र और घटोत्कक्ष के पुत्र वीर बर्बरीक का शीश विग्रह रूप में विराजमान है। बर्बरीक को उनकी अतुलनीय वीरता और त्याग के कारण भगवान श्री कृष्ण से यह वरदान मिला था कि कलियुग में बर्बरीक स्वयं श्री कृष्ण के नाम से जाएंगे। इसीलिए बर्बरीक श्री श्याम बाबा के रूप में खाटू धाम में पूजे जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब विद्वान बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा- हे प्रभु! इस जीवन का सर्वोत्तम उपयोग क्या है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री कृष्ण बोले- हे पुत्र, इस जीवन का सर्वोत्तम उपयोग परोपकार व निर्बल का साथ देना है। इसके लिए तुम्हें बल और शक्तियां अर्जित करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि महाभारत का युद्ध की समाप्ति पर महाबली भीमसेन को अभिमान हो गया कि युद्ध केवल उनके पराक्रम से जीता गया है। अर्जुन ने कहा कि वीर बर्बरीक के शीश से पूछा जाए कि उसने इस युद्ध में किसका पराक्रम देखा है। तब वीर बर्बरीक के शीश ने उत्तर दिया की यह युद्ध केवल भगवान श्रीकृष्ण की निति के कारण जीता गया। इस युद्ध में केवल भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र चलता था। भगवान श्रीकृष्ण ने पुन: वीर बर्बरीक के शीश को प्रणाम करते हुए कहा - हे वीर बर्बरीक आप कलियुग में सर्वत्र पूजित होकर अपने सभी भक्तों के अभीष्ट कार्य को पूर्ण करेंगे। इस मौके पर संस्था प्रधान अजय गोयल, सचिव अमित राज गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजय बंसल, संकीर्तन संयोजक मुकेश बंसल और राकेश बंसल, उपप्रधान अश्वनी जिंदल, मलिकराज गर्ग, तरसेम सिंगला, विजय तायल, विनय सिंगला, आशुतोष गोयल और मनीष मित्तल मौजूद रहे।