पानीपत। शहर के सेक्टर 29 पार्ट-2 स्थित सीईटीपी (कॉमन ईफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के सामने सोमवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। यहां नगर निगम की मुख्य सीवरेज लाइन के मैनहोल समेत करीब 50 फुट जमीन धंस गई। इससे 20 फुट गहरा गड्ढा बन गया। गनीमत रही कि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई। नगर निगम, बिजली निगम, एचएसवीपी और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी देर रात तक लगे रहे। जमीन देर रात तक लगातार धंस रही थी। इसका प्राथमिक कारण बारिश और केमिकल युक्त पानी बताया जा रहा है। इससे शहर की सीवर लाइन ठप होने का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले जीटी रोड पर सीवर धंस गया था। इससे एलिवेटेड हाईवे तक दिल्ली-चंडीगढ़ का यातायात डायवर्ट करना पड़ा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सोमवार दोपहर को मैनहोल के साथ छोटा गड्ढा बना। इसके बाद धीरे-धीरे जमीन धंसने लगी और गड्ढा बड़ा होता गया। देर शाम मैनहाल धड़ाम की आवाज के साथ धंस गया। रात करीब 10 बजे तक जमीन धंसने का असल और मुख्य कारण पता नहीं चल पाया था। अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि भारी बारिश इसका मुख्य कारण है। वहीं, आसपास की फैक्टि्रयों से निकलने वाले केमिकलयुक्त पानी ने मैनहोल की दीवारों के साथ भूमि कटाव किया है। इसके अलावा एचएसवीपी के पुराने औद्योगिक क्षेत्र के लिए बनाए गए नाले के खस्ताहाल होने से भी ऐसा होना माना जा रहा है। क्योंकि निगम की लाइन के साथ एक केमिकल युक्त गंदे पानी का ड्रेन भी है। इसका पानी अब निगम की लाइन में गिर रहा है। इसके अलावा लाइन के मैनहोल में भी अवैध कनेक्शन मिले हैं। दूर से देखने में गड्ढा करीब 50 फुट चौड़ा और 20 फुट तक गहरा दिखाई दे रहा था। हालांकि जमीन धंसने का सिलसिला देर रात तक जारी था।
अधिकारियों ने बताया कि अगर बारिश होती है तो उनके सामने चुनौती बड़ी हो जाएगी। एक और भूमि कटाव और जमीन धंसने से हादसे का डर बन गया है। दूसरी ओर शहर की निकासी लाइन को भी चालू रखा जाना जरूरी है। वहीं, एचएसवीपी के पुराने नाले का भी पानी अब निगम की लाइन में जा रहा है। हालांकि सीटीपी और सिवाह के दोनों एसटीपी सही तरीके से पानी को लिफ्ट कर रहे हैं।
निगम अधिकारियों ने रात को पूरी लाइन का सर्वे किया। इसके लिए टार्च और गाड़ियों की लाइटों को सहारा लिया। इसके अलावा एचएसवीपी ने मिट्टी के बैग भरकर भूमि कटाव वाली जमीन और टूटे नाले के बांध पर डाले। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर ड्रोन कैमरे का भी सहारा लिया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ फैक्ट्री संचालकों ने मैनहोल से अवैध कनेक्शन कर रखे हैं। जांच के दौरान दूसरे मैनहोल से इसके पुख्ता प्रमाण भी मिले हैं। केमिकल वाला पानी ईंटों को काटने लगता है। अनुमान है कि यहां भी यही हुआ होगा, जिससे ईंटों का मैनहोल ध्वस्त हो गया और कंक्रीट की लाइन बच गई। अधिकारियों का कहना है कि शहर की पूरी निकासी इसी पाइपलाइन से होकर सिवाह स्थित 25 और 35 एमएलडी के एसटीपी पर जाती हैं। इससे हर घंटे लाखों लीटर पानी को बड़ी मोटरों से लिफ्ट कराया जाता है। इसके लिए निगम ने छह फुट की कंक्रीट की लाइन बिछाई है। दूर से देखने में यह लाइन सही लग रही है। अगर लाइन डैमेज हुई तो नुकसान और भी ज्यादा होने की आशंका बन जाएगी।
नगर निगम की लाइन के पास जमीन धंसी है। अब तक इसके स्पष्ट कारण पता नहीं चल सके हैं। शहर की निकासी चालू रखने के पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। दूसरे सभी विभागों के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया है। अब तक स्थिति नियंत्रण में हैं। मंगलवार को सुबह यहां फिर से कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
- राजेश कौशिक, एक्सईएन, नगर निगम।