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यमुना बार्डर पर यूपी की ओर जाते 45 प्र वासी मजदूरों को पुलिस ने रोक कर वापस भेजा

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हरियाणा से यूपी की ओर प्रवासी मजदूरों के पलायन करने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। आए दिन प्रवासी मजदूर सनौली रोड पर बार्डर सील होने के कारण पुलिस की सख्ताई के चलते भी यूपी की ओर जाने की फिराक में रहते हैं। बुधवार सुबह करीब 45 प्रवासी मजदूर पैदल ही सनौली रोड से यमुना बार्डर पर यूपी की ओर जाने लगे तो बार्डर पर तैनात पुलिस टीम ने उन्हें यूपी जाने से रोका और फिर दो घंटे बाद सभी को बस से पानीपत में जांच के लिए भेज दिया। इससे पहले दो घंटे तक सभी मजदूर यमुना पुल पर बने टैक्स कलेक्शन कार्यालय के बाहर सड़क किनारे बैठे रहे। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे सभी 45 प्रवासी मजदूर रात से सफीदों, करनाल से पैदल 50 किलोमीटर चलते हुए यमुना बार्डर पार करने के लिए यूपी अपने घरों में जाना चाहते हैं। सभी प्राईवेट कंपनी में काम करते थे। अब कई दिनों से खाना भी नहीं मिल रहा था। पुलिस टीम ने यमुना बार्डर पर लगाई गई पुलिस बस में सभी मजदूरों को बैठाकर वापस पानीपत, करनाल की ओर भेज दिया और सभी को स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई।
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प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वे सड़क से ना आकर गांव-गांव के रास्ते पहुंचे तो कहीं पर भी किसी ने सुध तक नहीं ली। पिछले 18 घंटे से प्रवासी मजदूर भूखे प्यासे सफीदों, करनाल से 45 किलोमीटर पैदल चलकर यमुना के पास पहुंचे हैं। मजदूर सुरेश, बलवान, महाबीर, राजेश, महीपाल, निरदोस ने बताया कि वे सफीदों, करनाल फैक्ट्रियों में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते काम बंद है। पिछले डेढ़ महीने से किराये के मकानों में रह रहे थे। काम ना मिलने पर पैसे भी खत्म हो गए। उन्हें फैक्ट्रियों से भी खाना-पीने का सामान देना बंद हो जाने पर अब वे अपने घर यूपी जाना चाहते है। रास्ते में दुकानों से मांग कर बिस्कूट आदि खिला कर पानी पिलाकर उनकी भूख-प्यास बुझा रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्रियां बंद होने पर उनके पास जो पैसे थे वे मकान किराया और डेढ़ माह से राशन आदि खरीदकर खाने में खर्च हो गए और काम बंद पड़े हैं। शहर में उनकी किसी ने सुध नहीं ली है। अब उन्हें घर जाने के लिए कोई प्रबंध नहीं है,ं ना ही उनके रहने व खाने-पीने के लिए साधन हैं। अब वे भूखे मरने पर मजबूर हैं।
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