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Panipat News: निंबरी के कृष्ण और डाहर की सुषमा ने खेती से बदला जीवन

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महिला सुषमा वासी डाहर गांव को सम्मानित करते अधिकारी। स्वयं
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पानीपत। जिले के दो किसानों ने खेती में आधुनिक तरीकों को अपना खुद के साथ दूसरों को भी नई सीख दे दी। निंबरी के कृष्ण और डाहर की सुषमा ने खेती से जीवन ही बदल दिया। निंबरी गांव के कृष्ण कुमार फसल विविधिकरण को अपना बदलाव लेकर आए हैं, वहीं डाहर गांव की सुषमा कटाई के साथ सिलाई के क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। दोनों को राष्ट्रीय किसान दिवस पर चौ. कृषि विश्वविद्यालय हिसार में राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।
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सुषमा वासी डाहर गांव ने बताया कि वह बड़े ही साधारण परिवार से संबंध रखती है। उनके पति धर्मबीर मेहनत मजदूरी का काम करते है। उनके सहयोग से ही उन्होंने दस साल पहले सिलाई करना शुरू किया था, जिसके बाद उनकी सिलाई और कढ़ाई में रूचि बनती चली गई। वर्तमान में वह सिलाई और कढ़ाई के कार्य से ही अपने परिवार का लालन-पालन कर रही है। उनके तीन बच्चे दो लड़के और एक लड़की है, जो स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुरूआती दिनों में उन्होंने काफी संघर्ष कर इस कार्य को शुरू किया था साथ ही उनके पति के अलावा उनका साथ देने वाला भी कोई नहीं था। पति के साथ से ही उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और महिला सशक्तीकरण की ओर अग्रसर हुई। सरकार की ओर से उन्हें पिछले साल ही सिलाई मशीन भी नि:शुल्क दी गई है।
किसान कृष्ण वासी निंबरी गांव ने बताया कि उन्होंने दसवीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर खेती करने का निर्णय लिया। आज वे पारंपरिक खेती के लिए जाने जाते है। आज के समय में वह आधुनिक और व्यावसायिक खेती के लिए मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि असली बदलाव कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ने के बाद आया। इससे पहले वह बिना किसी तकनीक के खेती कर रहे थे। इसके बाद उन्हें उन्नत बीज, फसल चक्र, मिट्टी परीक्षण और कीट नियंत्रण की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और खेती के क्षेत्र में आगे बढ़ते चले गए। साथ ही ज्ञान के आधार पर कमाई के भी नए रास्ते खुलते चले गए।
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