अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। प्रदेश के किसान आम बजट 2017 में कृषि के लिए केंद्र सरकार और कृषि मंत्री से कृषि के लिए कुछ बेहतर घोषणाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रदेश के किसान और किसान संगठन किसानों को सरकार की ओर से सुविधा मिलने की बाट जोह रहे हैं। किसान कृषि उपज के हाल में मिल रहे रेट, धान और गेहूं के रेटों से नाराज हैं।
प्रदेश का किसान 2017 के आम बजट में कृषि क्षेत्र में खाद, बीज और फसलों के समर्थन मूल्यों को बेहतर होने की आस लगाए बैठा है। उन्हें आशा है कि शायद इस बार के आम बजट में सरकार किसानों के हितों में फैसला लेगी। किसानों का कहना है कि कृषि और कृषि की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को फसलों का उचित मूल्य देने की घोषणा हो जाए। इससे किसान की स्थिति बेहतर हो सकेगी और अधिक से अधिक लोग खेती की ओर अग्रसर होंगे। यदि अब भी किसानों को फसलों का उचित मूल्य नहीं मिला तो अधिकतर किसान कृषि क्षेत्र को ही छोड़ देंगे।
किसान बिजली बिल और कृषि उपकरणों में भी चाहते हैं छूट
प्रदेश के किसान कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बिजली बिल और कृषि उपकरणों पर छूट चाहते है। इससे कम मूल्यों और उचित ब्याज दरों पर कृषि उपकरण बाजार से प्रत्येक किसान को उपलब्ध हो सके। इससे खेती में अधिक पैदावार हो सके। प्रदेश के किसान सरकार से हर प्रकार से खेती को कुछ आसान कराना चाह रहे है। किसान यूनियनों का कहना है कि वे तो सिर्फ सरकार से उम्मींद लगा सकते है। अब सरकार के हाथ में ही है कि खेती को बढ़ावा देना है या नहीं।
फोटो कोट्स
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान जयकरण कादियान का कहना है कि कोई भी सरकार आए वह किसानों की ओर ध्यान नहीं देती। लेकिन, फिर भी हम अबकी बार 2017 में आने वाले बजट में किसानों के हित में अच्छी घोषणाओं की उम्मीद लगाए हुए हैं। इससे हमारा भविष्य बेहतर हो सके।
फोटो कोट्स
भारतीय किसान यूनियन के उपप्रधान बिंटू मलिक का कहना है कि सरकार खेती में पैदावार तो अधिक चाहती है। लेकिन, सरकार किसानों की ओर नहीं देखती है। नवंबर माह में नोटबंदी की घोषणा हुई। इस दौरान प्रदेश के किसानों को बीज तक लाने के पैसे नहीं मिल पाए थे।
फोटो कोट्स
कवि गांव के किसान कर्ण सिंह ने बताया कि सरकार से 2017 के बजट में किसानों के लिए अच्छी घोषणा की उम्मीद हैं। खाद और बीज पर सरकार छूट दे दे तो अच्छा रहेगा। खेतों में अधिक खाद की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन, खाद के रेट पिछले साल से अधिक हो गए हैं।
फोटो कोट्स
सिवाह गांव के किसान सूरज सिंह का कहना है कि अबकी बार धान प्रदेश के मंडियों में कई महीने ऐसे ही पड़ा रहा। फसलों की लागत तक कई बार नहीं निकलती। जब किसान के हाथ से फसल चली जाती है, तब सरकार उनका समर्थन मूल्य बढ़ाती है। इससे किसानों को घर चलाना मुश्किल हो जाता है।