मेरा बचपन से पिल्लों के साथ लगाव रहा है। इसलिए मैं नई पहल वेलफेयर सोसाइटी से जुड़ा हुआ हूं। जहां लगातार पिल्लों व अन्य बेजुबानों की मदद की जाती है। दो साल पहले मैंने अपनी गली से दो पिल्लों को घर पर रखना शुरू कर दिया। फिर परिवार के सदस्यों ने मिलकर इनका नाम जूनियर और टफी रखा। दोनों शुरुआती दिनों में परिवार व मेरे साथ इनके घुलने-मिलने में समय लगा लेकिन अब धीरे-धीरे वे परिवार का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
परिवार के सभी सदस्य उनकी देखभाल करते हैं। सुबह के समय नहलाना, खाना-खिलाना सब मैं करता हूं। दिन में जब मैं काम पर जाता हूं तो पूरा दिन मेरे परिवार के सभी सदस्य उनकी देखभाल करते हैं। काम से आने के बाद वे फिर से मेरे साथ रहने लगते हैं। परिवार में सबसे ज्यादा लगाव उनका मेरे साथ है। शाम को दोनों मेरे साथ ही खाना खाते हैं। जूनियर व टफी दोनों शाकाहारी खाना खा लेते हैं। उन्हें खाने में ज्यादातर घर का बना खाना रोटी, पनीर, सलाद, फल दिया जाता है लेकिन दोनों को सबसे ज्यादा चावल और लस्सी पसंद है। उन्हें मिठाई कभी-कभी दी जाती है। क्योंकि मिठाई पिल्लों की सेहत के लिए नुकसानदायक होती है।