संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। छह दिवसीय ग्लोबल यूथ फेस्टिवल का शनिवार को तीसरा दिन रहा। नेशनल यूथ प्रोजेक्ट, गांधी ग्लोबल फैमिली और संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता शहीद आजम सरदार भगत सिंह के भांजे एवं प्रसिद्ध चिंतक प्रोफेसर जगमोहन सिंह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मल दत्त, आर्य पीजी कॉलेज के प्राचार्य जगदीश गुप्ता, गुजरात के जूनागढ़ से आए चतुर्भुज राजपारा धर्मा नंद लखेड़ा ने की।
मुख्य वक्ता ने कहा कि शहीद भगत सिंह और महात्मा गांधी एक-दूसरे के पूरक थे। उन्होंने यह भ्रामक प्रचार कि महात्मा गांधी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने का कोई प्रयास नहीं किया, पूरी तरह गलत है। यदि भगत सिंह स्वयं चाहते तो वे फांसी से बच सकते थे लेकिन वे अपने जीवन को भारतीय युवाओं के लिए एक महानतम आदर्श बनाना चाहते थे ताकि अधिक से अधिक युवा राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो सकें। महात्मा गांधी और भगत सिंह की कार्यशैली में भले ही अंतर था लेकिन भगत सिंह भी अहिंसा के सिद्धांत को मानते थे। उन्होंने जेल में अपनी जायज मांगों के लिए 116 दिनों की भूख हड़ताल की थी। आज के दौर में शहीद भगत सिंह और महात्मा गांधी के दोनों विचारों को एक साथ अपनाने की आवश्यकता है ताकि पूरे विश्व में आतंकवाद का खात्मा हो सके और एक समता मूलक समाज की स्थापना की जा सके।
संयुक्त संयोजक अरविंद डावर ने कहा कि यह आयोजन बाबा हरदेव सिंह और महात्मा सुखदेव की प्रेरणा व आशीर्वाद से संभव हुआ है। यह फेस्टिवल युवाओं को गांधीवादी सिद्धांतों और भगत सिंह के क्रांतिकारी आदर्शों के माध्यम से वैश्विक शांति एवं एकता की दिशा में प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हो रहा है। यह आयोजन न केवल युवाओं को एकजुट करने का माध्यम बना बल्कि गांधी और भगत सिंह के संयुक्त विचारों को वैश्विक स्तर पर फैलाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ। फेस्टिवल के शेष दिनों में भी विभिन्न सत्रों के माध्यम से युवा इन आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित होंगे। इस अवसर पर नेशनल यूथ प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय सचिव रन सिंह परमार, ए सुकुमारन, मधुसूदन दास तथा गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव स्पर्श वर्मा, पूजा सैनी, आद्या त्यागी, दिव्या कपूर, राजेंद्र कुमार व नरेंद्र उपस्थित रहे।