हुडा द्वारा सेक्टर-29 पार्ट-टू के उद्यमियों को इनहांसमेंट के नोटिस आने पर शहर की 24 एसोसिएशन एकजुट हो गई हैं। उन्होंने हुडा के नोटिसों को लालाफीताशाही करार दिया है। उद्यमियों ने कहा कि वे हुडा को प्लाटों की तय राशि दे चुके हैं, अब हुडा खुद को बचाने के लिए उन पर इनहांसमेंट और जुर्माना राशि थोप रहा है। वे हुडा के दबाव में नहीं आएंगे। उद्यमियों ने डीसी से मिलकर अपनी बात खुलकर रखने का फैसला लिया है। इससे शहर में यह मामला एक बार फिर गरमा गया है।
डायर्स एसोसिएशन के बुलावे पर शहर की 24 औद्योगिक इकाइयों की बैठक मंगलवार को जीटी रोड स्थित एक होटल में हुई। इसमें इनहांसमेंट पॉलिसी के तहत उद्यमियों को भेजे नोटिसों पर विस्तार से बात की गई। सभी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी बात रखी। इनहांसमेंट के नोटिसों के विरोध में करारा जवाब देने का फैसला लिया गया। उद्यमियों ने कहा कि सेक्टर-29 पार्ट-टू 2000 में काटा गया था। किसानों को उस वक्त साढे़ तीन लाख प्रति एकड़ के हिसाब से हुडा ने दिया था। उनको आगे 1185 रुपये गज के हिसाब सेे प्लाट दिए गए। किसानों के कोर्ट में जाने के बाद 16.8 हजार रुपये प्रति एकड़ तय किया था। हुडा ने 2009 में राशि किसानों को दे दी। हुडा 2009 के बाद अब 2017 में इनहांसमेंट के लिए सामने आया है। उन्होंने दर्जनों उद्यमियों को इसके नोटिए दिए हैं।
जुर्माना के साथ ब्याज भरने को कहा
हुडा ने उद्यमियों को इनहांसमेंट राशि जमा कराने की आखिरी तारीख 25 मई दी है। वे इस राशि को जमा नहीं कराते तो हुडा ने मूल का 18 प्रतिशत जुर्माना और 12 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज जमा कराने के लिए कहा है। उद्यमियों ने इन सबको लेकर बुधवार को डीसी से मिलकर अपनी मांगों को रखने का फैसला लिया। बताया जा रहा है कि डायर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी शहरी विधायक के माध्यम मुख्यमंत्री से मिले थे, लेकिन उनको कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया।
सेक्टर-29 पार्ट-टू में सरकार और हुडा ने आज तक कोई सुविधा नहीं दी है। इसके चलते उद्यमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी उद्योगपतियों के साथ मनमर्जी के नियम लागू कर काम धंधों को चौपट करने में लगे हैं। अब उद्यमी एकजुट हैं और अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर जाएंगे। इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।
रमेश वर्मा, प्रधान, हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन, पानीपत।
उद्यमियों ने हुडा के अनुसार पैसे जमा करा दिए थे। अब हुडा इनहांसमेंट के नाम पर उनको नोटिस भेज रहा है। यहीं नहीं प्लाट खाली तक कराने की धमकी दी जा रही है। उद्यमी अधिकारियों की मनमर्जी को सहन नहीं करेंगे और इसका हर स्तर पर विरोध करेंगे। अधिकारी 2009 में पैसे जमा कराने के बाद अब 2017 में नोटिस दे रहा है। यह भी चिंता का विषय है।
भीम राणा, प्रधान, डायर्स एसोसिएशन पानीपत।
उद्यमियों को सरकारों की मनमर्जी के नियमों का हर्जाना भुगतना पड़ता है। जो भी सरकार आती है, अपने हिसाब से नियम बना देती है, जबकि उद्यमी सरकार को इमानदारी के साथ राजस्व जमा कराता है। वे सब सेक्टर-29 पार्ट-टू के उद्यमियों के साथ खड़े हैं। गलत फैसलों का सपोर्ट हरिगज नहीं किया जाएगा।
विनोद ग्रोवर, प्रधान, ओल्ड इंडस्ट्रीयल एरिया, पानीपत।
सेक्टर-29 पार्ट-टू में 2000 में प्लाट काटे गए थे। उस वक्त उन पर 1400 रुपये का भी रेट थोपा गया था। अधिकांश को पुराने प्लाट बेचकर यहां पर नए प्लाट लेने पड़े थे। अब अधिकारी इनहांसमेंट के नोटिस भेजे जा रहे हैं। अधिकारियों की मनमर्जी के चलते उनको काम धंधे बंद करने को मजबूर होना पड़ेगा।
तरुण गांधी, उद्यमी।
उद्यमी पर चारों से मार पड़ रही है। कॉलोनियों में लोग बिजली चोरी करते हैं, लेकिन लाइन लॉस का खामियाजा उद्यमियों को भुगतना पड़ता है। अधिकारी मनमर्जी के नियम लागू कर रहे हैं। वे जनप्रतिनिधियों से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं है।
भीम सचदेवा, उद्यमी।
उद्योगों के अलग से सेक्टर कटते ही उद्यमियों की परेशानी बढनी शुरू हो गई थी। अधिकारी हर रोज नए नियम लेकर फैक्ट्रियों में पहुंच जाते हैं। हुडा अधिकारी सुविधा के नाम पर पीछे हट जाते हैं और उद्यमी की छोटी सी गलती पर नियमों को गिनवाने लग जाते हैं।
एचएस धम्मू, उद्यमी।
सब सरकार और मुख्यमंत्री एक हैं। उद्यमियों को भी एकजुट होना होगा। नेता वोट लेने के वक्त बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में सबको भूल जाते हैं। उनसे मिलने को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है।
तरुण नागपाल, एसडी कॉलेज रोड एसोसिएशन।
इनहांसमेंट के नोटिसों को लेकर कानूनी राय लेकर कदम आगे बढ़ाएं। वे कानूनी कार्रवाई भी साथ लेकर चले। मैंने भी सेक्टर-25 में प्लाट लिया था और कोर्ट के फैसले के बाद 32 लाख और ब्याज हुडा से वापस लिया था। उद्यमी इसको लेकर हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर करें। उद्यमियों ने इसका समर्थन दिया।
विनोद खंडेलवाल, उद्यमी।