एनजीटी के सख्त होने के बाद पीएनजी पर सरकार की तरफ से कोई राहत न मिलने से उद्यमी एलपीजी के रूप में विकल्प तलाशने में लगे हैं। इंडियन ऑयल भी इसके लिए आगे आई है। उद्यमी और कंपनी अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक शनिवार रात को एक निजी होटल में हुई। मीटिंग में कंपनी के अधिकारियों ने उद्यमियों को एलपीजी के फायदे गिनवाए। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि अगर उद्यमी पीएनजी की जगह पर एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं तो उद्यमियों को पीएनजी के मुकाबले 25 प्रतिशत तक का फायदा होगा।
इंडियन ऑयल के सीनियर मैनेजर इंदीवर ने बताया कि पीएनजी लेने पर पहले ये फिक्स करना पड़ता था कि इनको उनकी कितनी जरूरत है। उस हिसाब से पहले ही पीएनजी की सप्लाई बुक करनी पड़ती थी। एलपीजी में उद्यमियों को इससे राहत मिलेगी। उद्यमियों को 38 रुपये पीएनजी व एलपीजी 28 रुपये किलोग्राम एलपीजी पड़ेगी। पहले स्टंटर, ड्रायर, प्रिंटिंग और बॉयलर में पीएनजी का इस्तेमाल होता था। उन्होंने पूरे हरियाणा के उद्योगों में इस माह 4 हजार टन एलपीजी की सप्लाई दी है। इस अवसर पर समीर शुक्ला, संजय खन्ना डीजीएम, जीएम एमके गुप्ता, विशाल, भीम राणा, जगदीश जैन, राम प्रताप गुप्ता, मुकेश रेवड़ी, दीनानाथ गुप्ता, धनराज बंसल मौजूद रहे।
एलपीजी-
कुकिंग गैस दो प्रकारों में उपलब्ध है। एक पाइप्ड गैस है और दूसरा एलपीजी सिलेंडर है। जबकि दोनों ज्वलनशील सामान हैं। उनकी हैंडलिंग और सुरक्षा के संबंध में कुछ अंतर है।
एलपीजी में प्रोपेन और ब्यूटेन होते हैं जो हवा से भारी होते हैं और इसलिए किसी भी लीक हुए एलपीजी के इसकी धीमी फैलाव दर के कारण जमीन पर बैठने की संभावना है। यह रिसाव एलपीजी धीरे-धीरे वाष्प बादल बना सकता है और एक विस्फोट का कारण बन सकता है। यदि यह एक प्रज्वलन स्रोत के संपर्क में आता है तो बड़ा विस्फोट हो सकता है।
पीएनजी-
पीएनजी या पाइप्ड नेचुरल गैस में मुख्य रूप से मिथेन गैस होती है। जो हवा से हल्की होती है। यह एलपीजी की तरह ही ज्वलनशील है, हालांकि, एलपीजी की तुलना में इसकी फैलाव दर बहुत अधिक है। इसलिए पीएनजी का एक फायदा है कि यह किसी भी रिसाव की स्थिति में तेजी से फैल जाएगा। पीएनजी के साथ संबद्ध नुकसान यह है कि यह पाइप के माध्यम से आपूर्ति की जाती है और इसलिए लगभग गैस का एक स्थायी स्रोत है। जो रिसाव के माध्यम से प्रवाहित होता रहेगा यदि अनुपस्थित छोड़ दिया जाता है, तो एक एलपीजी सिलेंडर के विपरीत जो अंतत: समाप्त हो जाएगा।
12 हजार करोड़ का कारोबार बचाने के लिए प्रयास-
पानीपत में भी ऐसे 1200 उद्योग हैं। इन पर कार्रवाई से पानीपत के 12 हजार करोड़ के उद्योग पर ताले लगेंगे और करीब 60 हजार लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उद्योगपतियों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें पीएनजी पर सब्सिडी दी जाए और पीएनजी लेने की समय सीमा भी बढ़ाई जाए। पानीपत में मात्र 7 उद्योग में ही पीएनजी की सप्लाई है। उद्यमियों की बार बार मांग के बाद भी इस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया और सब्सिडी देने से इंकार कर दिया। इसके बाद से ही उद्यमी पीएनजी का विकल्प तलाश रहे हैं, ताकि 12 हजार करोड़ का कारोबार बचाया जा सके।
डायर्स उद्यमी उधार भी करेंगे बंद
डायर्स उद्यमी बाजार में माल उधार देना भी बंद करेंगे। एक उद्यमी ने बताया कि पहले कोयला उधार पर ले लेते थे। ऐसे में वे भी अपना माल उधार में दे देते थे, लेकिन अब गैस के पैसे एडवांस में देने पड़ेंगे। वे अपने माल की पेमेंट 15 दिन से अधिक समय तक देने की स्थिति में नहीं हैं।
सूरत और लुधियाना व्यापार जाने की चिंता
उद्यमियों में पानीपत का डाइंग का कारोबार सूरत और लुधियाना जाने की चिंता बनी हुई है। दिल्ली से पानीपत व लुधियाना के माल में प्रति किलोग्राम एक रुपये का अंतर है। पीएनजी यूज करने पर रेट 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाना पड़ेगा। दिल्ली का उद्यमी इतना रेट देने को तैयार नहीं है। उद्यमी प्रदेश सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं, मगर कोई राहत नहीं मिली है।
सेक्टर 29 में पीएनजी की नहीं डली लाइन
अब तक सेक्टर 25, 25 पार्ट टू, सेक्टर 29 पार्ट टू में पीएनजी की सप्लाई की लाइन डल चुकी है, लेकिन पार्ट टू में अब भी पीएनजी की सप्लाई नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग सेक्टर 29 पार्ट टू के उद्यमियों को कुछ राहत दे सकता है। उद्योगपतियों का मत है कि सरकार पीएनजी संबधित इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार नहीं हुआ है। फिलहाल उद्योगों में कोयल, पेट्रोल व डीजल से काम चलता है। पीएनजी का सेटअप भी उद्योगों में नहीं है। पीएनजी की सप्लाई लेने से पहले उद्योग का पूरा सेटअप भी चेंज करना पड़ेगा। इससे उद्योगों पर ताले लटकने का भी खतरा है। सरकार को उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, नाकि उद्योगों को बंद करने की प्लानिंग तैयार करनी चाहिए। पानीपत टेक्सटाइल नगरी एशिया की सबसे बड़ी टेक्सटाइल नगरी है।
सीपीसीबी ने 15 दिन में मांगी थी कार्रवाई रिपोर्ट
गत 18 दिसंबर 2018 को एनजीटी ने मीटिंग की एनसीआर के सभी उद्योगों को 31 मार्च 2019 तक नेचुरल गैस पाइप लाइन में परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन निर्देशों पर सही प्रकार से काम नहीं हुआ। इसके बाद एनजीटी ने दोबारा चार अप्रैल को मीटिंग कर सीपीसीबी को निर्देश दिए कि सभी 23 जिलों के उद्योगों में 30 अप्रैल तक नेचुरल गैस की सप्लाई दी जाए और पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले ईंधन को बंद किया जाए। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी ने भी एक जनवरी 2019, 22 फरवरी, 23 अप्रैल, 15 मई व 31 मई को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मीटिंग की और एनजीटी के निर्देशों पर नेचुरल गैस पाइप लाइन का इस्तेमाल नहीं करने वाले उद्योगों में सप्लाई कराने के निर्देश दिए, लेकिन धरातल पर ये कार्य नहीं हुआ। अब एनजीटी ने 23 जिले के उन उद्योगों को बंद करने के निर्देश दे दिए है जो पीएनजी में परिवर्तित नहीं थे। सीपीसीबी ने 9 अगस्त को पत्र जारी करते हुए एसएचपीसीबी को से इस संबंध में 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी थी।
110 उद्योगों को बंद करने हो चुके हैं निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) लगातार प्रदूषण कम करने को लेकर सख्ती बरत रहा है। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी दो साल में पानीपत के 110 बड़े उद्योगों को बंद करने व 160 को नोटिस जारी कर चुकी है। अब एनजीटी ने पाइन नेचुरल गैस नहीं लेने वाले सभी उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के ये निर्देश दिल्ली-एनसीआर एवं आसपास के 23 जिलों को जारी किए गए हैं, जिनसे दिल्ली की आबोहवा खराब हो रही है। एनजीटी के इन आदेशों के दायरे में पानीपत समेत 23 जिलों के लगभग 60 प्रतिशत उद्योग आते हैं। एनजीटी के इन निर्देशों से उद्योगपतियों में रोष बना हुआ है। इन आदेशों के बाद एनसीआर में 10 लाख से अधिक लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
रिफाइनरी पर लगाया था 17 करोड़ का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने पानीपत रिफाइनरी पर वायु प्रदूषण फैलाने और भूजल खराब करने के आरोप में 17.31 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। रिफाइनरी को उक्त राशि एक माह में सीपीसीबी में जमा करानी थी। एनजीटी ने रिफाइनरी को जल्द ही अपनी व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश दिए थे। एनजीटी के चेयरपर्सन आदर्श कुमार, ज्यूडीशियल मेंबर एसपी वांगड़ी, जस्टिस के रामाकृष्णन, ज्यूडीशियल मेंबर व एक्सपर्ट मेंबर नागेन नंदा ने डीसी सुमेधा कटारिया, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर 10 मई 2019 को मुआवजा वसूलने के आदेश जारी किए थे। 5 जुलाई को रिफाइनरी को जुर्माना जमा कराना पड़ा था। इससे पहले शुगर मिल भी 20 लाख रुपये जुर्माना एनजीटी में जमा करवा चुका है।
सरकार उद्योग बंद करने में जुटी
एनसीआर के दायरे में आने के बाद पानीपत की इंडस्ट्री दिन-ब-दिन तबाह होती जा रही हैं। छह रुपये किलो की पीएनजी 36 रुपए किलो के भाव में सरकार उन्हें देगी तो वह कारोबार कैसे कर पाएंगे। एक वॉयलर को बदलने में करीब छह माह का वक्त लग जाएगा। एक टन से तीन टन तक के वॉयलर में करीब 30 लाख और तीन से पांच टन तक के वॉयलर में 50 लाख तक का खर्चा आ जाएगा। पानीपत में करीब 1200 इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनमें वॉयलर का प्रयोग किया जाता है। सीपीसीबी ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। ऐसे में पानीपत के उद्यमियों को अपनी- अपनी इंडस्ट्री को एशिया में किसी और स्थान पर शिफ्ट करना पड़ जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड इंडस्ट्रियों को तबाह करने में जुटा हुआ है।
भीम सिंह राणा, सेक्टर- 29 पार्ट टू डायर्स एसोसिएशन प्रधान