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बिना एनओसी भूजल का दोहन करने वाली शहर की 47 फैक्टरियों पर नहीं की कार्रवाई, एनजीटी ने लगाई फटकार

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भूजल को प्रदूषित करने वाली व बिना एनओसी के भूजल का दोहन करने वाली शहर की 47 फैक्टरियों से रिकवरी करने कार्रवाई करने के लिए एनजीटी ने भू जल प्राधिकरण को एक माह का और अतिरिक्त समय दिया है। पिछले माह भी एनजीटी ने इन उद्योगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन भू जल प्राधिकरण ने इन पर कार्रवाई नहीं की। प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों पर समय से कार्रवाई ना होने पर एनजीटी ने एचएसपीसीबी को फटकार भी लगाई और नियमित रूप से फैक्टरियों का इंस्पेक्शन करने निर्देश दिए हैं।
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बता दें कि बिना अनुमति के ग्राउंड वाटर निकाल रही 47 इंडस्ट्रीज की पहचान हुई थी। इन पर जुर्माना भी लगाया गया था। शहर में 8 फैक्टरियों के पास ही भूजल निकालने के लिए एनओसी है। अब 40 और बड़ी फैक्टरियों ने एनओसी के लिए अप्लाई किया है।
ट्यूबवेल के पानी की जांच के भी निर्देश
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नगर निगम और पब्लिक हेल्थ के ट्यूबवेल से पानी की क्वालिटी भी जांचने का आदेश दिया है। सीपीसीबी ने मई में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 15 दिनों में इन इंडस्ट्रीज पर कार्रवाई करने व अगले 15 दिन के अंदर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जून माह में ही ये फैक्टरियां बंद हो सकती है। ग्राउंड वाटर के गिरते स्तर और इंडस्ट्रीज के प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद सीपीसीबी ने बड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है। बोर्ड ने इस संबंध में जिला प्रशासन को कार्रवाई का आदेश दिया है। जल्द ही इस मामले की रिपोर्ट भी मांगी है।
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400 से अधिक यूनिट निकाल रही बिना परमिशन के भूजल
दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 47 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यहां 400 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही है। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया है।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल
सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वालिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए।
10 साल में 5 डीसी आए, किसी ने नहीं दिया भू-जल स्तर पर ध्यान
पिछले 10 साल में पानीपत का भू-जल स्तर 15 फीट तक नीचे गिर गया। पानीपत की औद्योगिक इकाइयों, अवैध रूप से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लगे ट्यूबवेल लगातार भूमिगत जल का दोहन करते रहे। 10 साल में 5 डीसी पानीपत में आए, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 10 साल पहले तक भूजल प्राधिकरण भी सक्रिय नहीं था। इस कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। आरोप ये भी है कि उद्योगपतियों की राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलीभगत होती थी, इसलिए औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषित पानी सीधा भूमिगत जल पर छोड़ने पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए पिछले दो साल से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही पानीपत में उद्योगों में छापामारी कर कार्रवाई करता आया है।
ऐसे तो पानीपत का उद्योग बंद हो जाएगा : राणा
ये हमारे साथ बहुत गलत हो रहा है। अगर डाइंग यूनिट बंद हो गई तो टेक्सटाइल भी बंद हो जाएगा और पानीपत का उद्योग ठप हो जाएगा। सरकार को राज्य भू जल प्राधिकरण का गठन करना चाहिए।
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-भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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