एनजीटी ने पीएनजी की सप्लाई नहीं लेने वाले उद्योगों को बंद करने के आदेश दे दिए हैं। इस संबंध में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 15 दिन में कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के निर्देश पर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 3 उद्योगों को क्लोजर नोटिस जारी कर चुका है। वहां की बिजली सप्लाई भी बंद कर दी गई है। ऐसे में 1200 उद्योगों में काम करने वाले करीब चार लाख लोग 25 से बेरोजगार हो सकते हैं। वहीं 29 पार्ट टू डायर्स एसोसिएशन प्रधान भीम सिंह राणा ने कहा कि वे जल्द ही इस संबंध में सीपीसीबी के चेयरमैन से मिलने जाएंगे।
जानकारी के अनुसार पानीपत के 1200 उद्योगों में 700 से अधिक डाई हाउस है। कपड़ा उद्यमियों को कपड़ा तैयार करने के बाद डाई पानीपत में ही कराना होता है। ऐसे में पानीपत के 12 हजार उद्यमियों का रोजगार छिन जाएगा और 4 लाख से अधिक कर्मचारियों का रोजगार भी खतरे में पड़ जाएगा। उद्यमी पिछले एक माह से लगातार कैबिनेट मंत्रियों व विधायकों के दरवाजों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सिवा आश्वासन के कुछ नहीं मिला। अब उद्योगपतियों ने फैसला कर लिया है कि वो पानीपत से पलायन कर दूसरे राज्यों में अपना कारोबार करेंगे। पानीपत की घरेलू मार्केट 45 हजार करोड़ व निर्यात 12 हजार करोड़ का है।
एनजीटी ने 7 अगस्त को एनसीआर के उन सभी उद्योगों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए है। जिसमें ब्वायलर का इस्तेमाल होता है और उन्होंने पीएनजी की सप्लाई नहीं ली है। इन उद्योगों को एनजीटी ने आठ माह पहले भी पीएनजी की सप्लाई लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन पानीपत के मात्र एक उद्योगपति के पास ही पीएनजी की सप्लाई है। अब 25 अगस्त तक एनजीटी ने एचएसपीसीबी को इन सभी उद्योगों पर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं निर्देशों पर कार्रवाई जारी है। पानीपत में भी ऐसे 1200 उद्योग हैं। उद्योगपतियों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें पीएनजी पर सब्सिडी दी जाए और पीएनजी लेने की समय सीमा भी बढ़ाई जाए।
सेक्टर 29 में पीएनजी की नहीं डाली लाइन
पानीपत एशिया का सबसे बड़ा टेक्सटाइल नगर है। अब तक सेक्टर 25, 25 पार्ट टू, सेक्टर 29 पार्ट टू में पीएनजी की सप्लाई की लाइन डल चुकी है, लेकिन पार्ट टू में अब भी पीएनजी की सप्लाई नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग सेक्टर 29 पार्ट टू के उद्यमियों को कुछ राहत दे सकता है। उद्योगपतियों का मत है कि पीएनजी से संबधित इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार नहीं हुआ है। फिलहाल उद्योगों में कोयल, पेट्रोल व डीजल से काम चलता है। पीएनजी का सेटअप भी उद्योगों में नहीं है। पीएनजी की सप्लाई लेने से पहले उद्योग का पूरा सेटअप भी चेंज करना पड़ेगा। इससे उद्योगों पर ताले लटकने का भी खतरा है। सरकार को उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि उद्योगों को बंद करने की प्लानिंग तैयार करनी चाहिए।
एनजीटी ने सीबीसीबी से मांगी थी 15 दिन में रिपोर्ट
गत 18 दिसंबर 2018 को एनजीटी ने मीटिंग की एनसीआर के सभी उद्योगों को 31 मार्च 2019 तक नेचुरल गैस पाइप लाइन में परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन निर्देशों पर सही प्रकार से काम नहीं हुआ। इसके बाद एनजीटी ने दोबारा चार अप्रैल को मीटिंग कर सीपीसीबी को निर्देश दिए कि सभी 23 जिलों के उद्योगों में 30 अप्रैल तक नेचुरल गैस की सप्लाई दी जाए और पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले ईंधन को बंद किया जाए। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी ने भी एक जनवरी 2019, 22 फरवरी, 23 अप्रैल, 15 मई व 31 मई को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मीटिंग की और एनजीटी के निर्देशों पर नेचुरल गैस पाइप लाइन का इस्तेमाल नहीं करने वाले उद्योगों में सप्लाई कराने के निर्देश दिए, लेकिन धरातल पर ये कार्य नहीं हुआ। अब एनजीटी ने 23 जिले के उन उद्योगों को बंद करने के निर्देश दे दिए जन जो पीएनजी में परिवर्तित नहीं थे। एनजीटी ने सीपीसीबी से इस संबंध में 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है।
110 उद्योगों को बंद करने हो चुके हैं निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) लगातार प्रदूषण कम करने को लेकर सख्ती बरत रहा है। एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी दो साल में पानीपत के 110 बड़े उद्योगों को बंद करने व 160 को नोटिस जारी कर चुकी है। अब एनजीटी ने पाइन नेचुरल गैस नहीं लेने वाले सभी उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के ये निर्देश दिल्ली-एनसीआर एवं आसपास के 23 जिलों को जारी किए गए हैं, जिनसे दिल्ली की आबोहवा खराब हो रही है। एनजीटी के इन आदेशों के दायरे में पानीपत समेत 23 जिलों के लगभग 50 प्रतिशत उद्योग आते हैं। एनजीटी के इन निर्देशों से उद्योगपतियों में रोष है।
- रिफाइनरी पर लगाया था 17 करोड़ का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने पानीपत रिफाइनरी पर वायु प्रदूषण फैलाने और भूजल खराब करने के आरोप में 17.31 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। रिफाइनरी को उक्त राशि एक माह में सीपीसीबी में जमा करानी थी। एनजीटी ने रिफाइनरी को जल्द ही अपनी व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश दिए थे। एनजीटी के चेयरपर्सन आदर्श कुमार, ज्यूडीशियल मेंबर एसपी वांगड़ी, जस्टिस के रामाकृष्णन, ज्यूडीशियल मेंबर व एक्सपर्ट मेंबर नागेन नंदा ने डीसी सुमेधा कटारिया, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट पर 10 मई 2019 को मुआवजा वसूलने के आदेश जारी किए थे। 5 जुलाई को रिफाइनरी को जुर्माना जमा कराना पड़ा था।
वर्जन
उद्योगों को लेकर सरकार की नीतियों में खामी है। ग्राउंड लेवल पर काम करके सरकार को नीतियां बनानी चाहिए। ऐसे तो औद्योगिक नगरी बंद हो जाएगी। सरकार को उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि उन्हें बंद करना चाहिए। देश के विकास में औद्योगिक क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है।
विनोद खंडेलवाल, चेयरमैन चैंबर ऑफ कॉमर्स
छह रुपये किलो की पीएनजी 36 रुपए किलो के भाव में सरकार उन्हें देगी तो वह कारोबार कैसे कर पाएंगे। एक वॉयलर को बदलने में करीब छह माह का वक्त लग जाएगा। एक टन से तीन टन तक के वॉयलर में करीब 30 लाख और तीन से पांच टन तक के वॉयलर में 50 लाख तक का खर्चा आ जाएगा। पानीपत में करीब 1200 इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनमें वॉयलर का प्रयोग किया जाता है। सीपीसीबी ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। ऐसे में पानीपत के उद्यमियों को अपनी इंडस्ट्री को एशिया में किसी और स्थान पर शिफ्ट करना पड़ जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड इंडस्ट्रियों को तबाह करने में जुटा हुआ है। पानीपत के 65 हजार लोग बेरोजगार होंगे। तीन हजार से अधिक उद्यमियों की रोटी छिन जाएगी। इस बारे में जल्द सीपीसीबी के चेयरमैन से मिलेंगे।
भीम सिंह राणा, सेक्टर- 29 पार्ट टू डायर्स एसोसिएशन प्रधान