ट्रेनों की गति अधिक होने से नहीं लगता पाता
रेलवे हादसों की पहचान में आने वाली एक बड़ी समस्या यह भी है कि ट्रेनें अत्यधिक गति से गुजरती हैं। ट्रेन की स्पीड तेज होने से किसी घटना के स्थल का पता लगाना कठिन हो जाता है। जब तक लोको पायलट दुर्घटना की शुरुआती सूचना देते हैं तब तक ट्रेन कई किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी होती है। लगभग दो से तीन मिनट में ही ट्रेन दस किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय कर लेती है इसलिए घटना की सही जगह का तुरंत पता लगाना मुश्किल हो जाता है। मामलों में कमी आई है लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
आरपीएफ नियमित रूप से सड़कों, स्टेशन प्लेटफॉर्म और गांवों में जाकर जनता को नुकसान और कानूनी परिणामों के बारे में समझा रही है। लोगों को यह समझाया जा रहा है कि पत्थरबाजी न केवल ट्रेन व यात्रियों के लिए जानलेवा है बल्कि पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई भी होती है। जागरूकता अभियान के चलते कई जगहों पर समुदायों ने सहयोग किया और मामलों में कमी आने लगी। -दिनेश कुमार मीना, प्रसारी, आरपीएफ।