पानीपत। आर्यिका आर्षमति माता ने कहा कि संसार में पैसे वाले का सम्मान नहीं है अपितु पैसे का दान करने वाले का सम्मान होता है। जैन आगम के अनुसार, दान एक अत्यंत महत्वपूर्ण कर्म है, जो आत्मा को शुद्ध करता है और मोक्ष की तरफ ले जाता है। दान देने से व्यक्ति को भौतिक जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।
उन्होंने ये बात मंगलवार को स्थानीय जैन मोहल्ला स्थित श्री 1008 महावीर स्वामी दिगंबर जिनालय (छोटा मंदिर) नवीनीकरण पंच दिवसीय महोत्सव के चौथ दिन कही। यह आयोजन आर्यिका 105 आर्षमति माता के पावन सानिध्य में धूमधाम के साथ मनाया गया।
मंगलवार को सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक व शांति धारा की। इसके उपरांत महावीर जिनालय (छोटा मंदिर) से श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी की एक प्रतिमा याग मंडल विधान के लिए श्री दिगंबर जैन बडा मंदिर जी के नवीन जिनालय में सौधर्म इंद्र बने पुनीत जैन अपने मस्तक पर धारण कर लेकर आए। मंदिर में पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान कर अभिषेक व विश्व शांति कामना के लिए शांति धारा की।
अष्टकुमारियों ने चौक पुराया व सौधर्म इंद्र, धनपति कुबेर और अन्य इंद्रों को हल्दी लगाकर शगुन किया। इंद्राणियों ने अस्थायी वेदी की शुद्धि की। प्रतिष्ठाचार्य डाॅ. अभिषेक जैन के कुशल निर्देशन में वेदी शुद्धि की प्रक्रिया प्रारंभ की व श्री यागमंडल विधान के तत्पश्चात मंत्रों के साथ आहुति दी।
आर्यिका आर्षमति माता ने कहा कि दान जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण कर्म है जो व्यक्ति को आत्मा की शुद्धि, मोक्ष प्राप्ति, मन की शांति और सामाजिक कल्याण में मदद करता है। दान देते समय विधि, पात्र और सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए।
श्री दिगंबर जैन पंचायत के सचिव मनोज जैन ने बताया कि 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर प्रातः की बेला में बैंड बाजे व शहनाई वादन के साथ छोटे मंदिर से सभी प्राचीन जिनबिम्बों को इंद्रों के द्वारा मस्तक पर विराजमान कर नवीन जिनालय बड़ा मंदिर में विराजमान किया जाएगा।
पुनीत जैन व संजना जैन को सौधर्म इंद्र, मनोज जैन अंजू जैन को कुबेर इंद्र, संजीव जैन मंजू जैन को यज्ञनायक, पंकज जैन व पूनम जैन को महेंद्र इंद्र, सुरेश जैन अनु जैन को इसान इंद्र और बृजभूषण जैन व संगीता जैन को सनत कुमार इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। एडवोकेट मेहुल जैन ने बताया कि प्राचीन प्रतिमाएं अस्थायी रूप से बड़े मंदिर की में विराजमान हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि जैन धर्म में अक्षय तृतीया को इक्षु तृतीया भी कहा जाता है। इस अवसर पर अध्यक्ष सुनील जैन, सुरेश जैन, मनोज जैन, सुशील, दिनेश, रुलियाराम जैन, कुलदीप जैन, संजीव जैन व प्रदीप जैन मौजूद रहे।