समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने धर्म के मूल विनय के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि विनयी व्यक्ति ही सभी नियमों का पालन करता है। दूसरों के प्रति सम्मान रखता है और अपने जीवन में सुख-शांति प्राप्त करता है। विनय व्यक्ति को विनम्रता सिखाता है व उसे सभी रिश्तों को निभाने में मदद करता है। जो अंततः मोक्ष तक ले जाता है। विनय क्रोध, मान, माया और लोभ को त्यागने में मदद करता है। जो सभी सद्गुणों का नाश करते हैं।
उन्होंने कहा कि विनय व्यक्ति को शत्रुता से दूर रखता है और उसे दूसरों के साथ मित्रवत संबंध बनाने की क्षमता देता है। विनय से व्यक्ति शास्त्रों का ज्ञान और कीर्ति अर्जित करता है। विनयी व्यक्ति ही समाज और परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों को ठीक से निभा पाता है। जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है। उसे सबसे पहले विनय का पालन करना चाहिए।