समालखा। जैन मुनि उपेंद्र ने कहा कि आध्यात्मिक परंपराओं के अनुसार मनुष्य जीवन को अत्यंत दुर्लभ और अनमोल माना गया है। उन्होंने ये प्रवचन नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में सोमवार को कहे। उन्होंने कहा कि मानव जन्म एकमात्र ऐसा जीवन है, जिसमें जीव आत्मा अपनी मुक्ति प्राप्त कर सकता है। जबकि अन्य योनियों में ऐसी क्षमता सीमित होती है। इसे मोक्ष प्राप्ति का द्वारा माना जाता है और सत्संग, सेवा व आध्यात्मिक साधनाओं के माध्यम से इस जीवन को सफल बनाया जा सकता है। अन्य सभी योनियों की तुलना में मनुष्य के पास चेतना की विशेष स्थिति होती है। जो उसे सही-गलत, ज्ञान और भक्ति का भेद समझने की क्षमता देती है। मनुष्य जीवन ही एकमात्र ऐसा जीवन है, जहां से आवागमन (जन्म-मृत्यु के चक्र) से छुटकारा पाने का मार्ग खुलता है और परमानंद प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य सत्संग, सेवा, जप, तप, योग और अन्य आध्यात्मिक अनुष्ठानों द्वारा आत्म-ज्ञान प्राप्त कर सकता है। मनुष्य के भीतर अनंत, असीम और अतुल्य बनने की क्षमता होती है। ऐसी अनुभूति देवताओं को भी नहीं हो सकती। क्योंकि देवताओं का जीवन भी सीमित होता है। सत्संग में भाग लेना और सत्कर्मों में लगना मनुष्य जीवन का सबसे अच्छी कमाई है। संवाद