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Haryana: इतना पढ़ा लिखा युवक कैसे बन गया आतंकी, गांववासी हैरान

Fri, 22 Mar 2024 07:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संदीप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)

सार

अनुराग की गिरफ्तारी के बाद दिवाना गांव में उसके बावत तेजी से चर्चा फैली है। किसी को इस बात का विश्वास नहीं हाे रहा है कि अनुराग आईएसआईएस आंतकी बन चुका है।
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पानीपत का अनु़राग उर्फ रेहान (दाएं) हरीश अजमल फारूखी (बाएं)। गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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परिवार व पूरे पानीपत के दीवाना गांव के लोगों को बुधवार को उस समय झटका लगा। जब उन्हें पता चला कि अनुराग अब रेहान बनकर आईएसआईएस का खुंखार आतंकी बन गया है। उसको असम एसटीएफ ने भारत बांग्लादेश बॉर्डर से गिरफ्तार किया। गांववासी यह सोचकर हैरान हैं कि इतना पढ़ा लिखा युवक आखिर आतंकी कैसे बन गया।

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उल्लेखनीय है कि मार्च 1992 में दीवाना गांव के मनबीर (35) की खेत में काम करते हुए करंट लगने से मौत हो गई थी। मनबीर पेशे से वकील था। उसकी पत्नी सरोज अंग्रेजी और हिंदी से एमए पास हैं। पति मनबीर की मौत के बाद सरोज अपने दोनों बेटों अनुराग व चिराग को लेकर सोनीपत चली गईं। यहां किराये पर रहती थीं।

दोनों बेटों का निजी स्कूल में दाखिला करा दिया। सरोज ने दीवाना गांव में अपने पौने 10 एकड़ भूमि को ठेके पर दे दिया था। 700 गज के मकान को किराये पर दे दिया था। यहां से जो पैसे आते सरोज उनसे घर चला रही थी। अनुराग व चिराग दोनों ने बीटेक की पढ़ाई की ।
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पांच साल पहले अनुराग व चिराग की सरकारी नौकरी लगी। चिराग इस्पात मंत्रालय और अनुराग रेलवे में बतौर सेक्शन ऑफिसर चयनित हुआ। उस समय पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। दोनों भाइयों ने दो साल पहले सोनीपत में एक करोड़ का फ्लैट भी खरीद लिया। दो साल पहले ही सरोज दोनों बेटों को लेकर रोहिणी के सेक्टर-18 में शिफ्ट हो गई। चिराग व अनुराग दोनों की दिल्ली में ड्यूटी थी। अनुराग ने पिछले दो साल से परिवार से वास्ता कम कर दिया था।

अब उसने दाढ़ी बढ़ा ली थी। किसी से बातचीत नहीं करता था। परिवार व पूरे दीवाना गांव को बुधवार को उस समय झटका लगा। जब पता चला कि अनुराग अब रेहान बनकर आईएसआईएस का खुंखार आतंकी बन गया है। उसको असम एसटीएफ ने भारत बांग्लादेश बॉर्डर से गिरफ्तार किया।

अनुराग ने चोरी छुपे लगभग दो साल पहले बांग्लादेश की युवती से निकाह किया था। इसका उसकी मां सरोज व भाई चिराग को पता नहीं था। पड़ोसियों ने बताया कि अब अनुराग अपने भाई चिराग व मां सरोज से अलग रहने लगा था। उसकी मां सरोज ने उन्हें इस बारे में बताया था कि अनुराग बदल गया है।

अब वो न तो दाढ़ी काटता है और न ही कार्यालय में अच्छे कपड़े पहनकर जाता है। उसने बातचीत भी कम कर दी है। तीन चार माह में एक बार उनसे मिलने आता है। मोबाइल पर भी कम ही बात करता है। सरोज छह सात माह में एक बार गांव में आती थी। यहां अपने मकान की देखभाल व जमीन की जानकारी लेकर वापस चली जाती थी।

अनुराग के 700 गज में बने दो कमरों के मकान में एक प्रवासी परिवार किराए पर रहता है। आंगन में बग्गी खड़ी है। यहीं पर अनुराग का बचपन बीता था। अनुराग व चिराग लगभग 10 साल से गांव नहीं आए थे। सिवाह गांव का जयकुमार ने उनके पौने 10 एकड़ भूमि ठेके पर ली है। पानीपत पुलिस भी दिवाना गांव जाकर अब अनुराग के बारे में जानकारी जुटा रही है।

असम एसटीएफ कर सकती है उसकी मां और भाई से पूछताछ
अनुराग की गिरफ्तारी के बाद दिवाना गांव में उसके बावत तेजी से चर्चा फैली है। किसी को इस बात का विश्वास नहीं हाे रहा है कि अनुराग आईएसआईएस आंतकी बन चुका है। अनुराग बड़े ही संपन्न परिवार से तालुक रखता है। उसके दादा मौजी राम का गांव में काफी नाम है। वो उस जमाने के आठवीं पास थे। अनुराग के पिता मनबीर पेशे से वकील थे। उन्होंने एलएलबी व एलएलएम की थी। मां सरोज एमए पास हैं। ऐसे में उसके परिवार का गांव में एक अलग रसूख है।

वो खाते में पैसे भेज देते हैं, मालकिन कम ही आती हैं- संगीता
अनुराग के मकान में किराए पर रह रही संगीता ने बताया कि वो अपने पति के साथ सात माह से यहां किराए पर रहती हैं। वो मालकिन को 1500 रुपये मासिक किराया देती हैं। मालकिन तो यहां कम ही आती हैं। वो मकान की देखरेख करती है। 1500 रुपये मासिक किराया वो उनके खाते में भेज देते हैं।

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