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Panipat News: स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट एंबुलेंस को अपने बेडे़ में करेगा शामिल,

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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट एंबुलेंस को अपने बेड़े में शामिल करेगा। इसमें एबुलेंस संचालक को सरकार द्वारा तय रेट का किराया दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसको पूरे प्रदेश में लागू करने का फैसला लिया है। इसी महीने इस पर जिला स्तर पर काम किया जाएगा। इसके लिए एंबुलेंस संचालकों को अपनी रजामंदी देनी और जीपीएस 24 घंटे ऑन रखना होगा। विभाग का मानना है कि ऐसा होने पर सड़क हादसों व दूसरे आपातकाल में नजदीकी एंबुलेंस को तुरंत भेजना आसान होगा। इससे घायलों को समय पर प्राथमिक इलाज मिलेगा और मृत्युदर को भी कम किया जा सकेगा।
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स्वास्थ्य विभाग के डीजी डॉ. रणदीप सिंह पूनिया ने इसको लेकर प्रदेशभर के सीएमओ वीडियो काॅन्फ्रेंस पर चर्चा की है। उन्होंने जिलावार सीएमओ से एंबुलेंस की संख्या के साथ इसके विकल्प के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं हैं और जरूरत पड़ने पर इसको पूरा भी किया जा सकता है। अब सड़क हादसों में घायलों और अन्य आपातकाल में मौके पर एंबुलेंस पहुंचाना जरूरी है। किसी जिले में एंबुलेंस पर्याप्त नहीं हैं तो वे प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों से सहयोग ले सकते हैं। उनको मुख्यालय से कॉल कर हादसे की लोकेशन भेजी जाएं। इससे हादसों में घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार मिलेगा और मृत्युदर में कमी आएगी। एंबुलेंस संचालक को सरकार के तय रेट का किराया दिया जाएं।
स्वास्थ्य विभाग के पास जिला में अपनी 26 एंबुलेंस हैं। कई बार हादसों स्थल से सरकारी एंबुलेंस दूर होती है। ऐसे में आपातकाल सेवा पहुंचने में समय लगता है या फिर दूसरे विकल्प अपनाने पड़ते हैं। इन सबके चलते इलाज में देरी होने पर मामला गंभीर भी हो जाता है। अब नजदीकी लोकेशन पर खड़ी एंबुलेंस को मौके पर रवाना किया जाएगा।
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सड़क और अस्पताल के गेट पर हो चुके हैं प्रसव के मामले
जिले में समय पर एंबुलेंस या अन्य सेवाएं न मिलने पर कई महिलाओं की सड़क व अस्पताल के प्रांगण में प्रसव हो चुकी है। पिछले दो महीने में तीन-चार ऐसे मामले आ चुके हैं। ऐसे में जच्चा बच्चा की जान को खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग पर कई बार सवाल उठ चुके हैं। इन मामलों में सीएससी और पीएचसी या फिर घर पर एंबुलेंस समय पर न पहुंचने के आरोप लगे हैं। लोगों का आरोप रहता है कि ऐसे में उनको अपने वाहनों या ऑटो में गर्भवती को लेकर चलना पड़ा था।


प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों की हादसों में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में मदद ली जाएगी। उनकी रजामंदी पर आपातकाल में सहयोग लिया जाएगा। मुख्यालय से जीपीएस पर नजदीकी एंबुलेंस को हादसा स्थल पर भेजा जाएगा। उनको सरकार के तय रेट के आधार पर किराया दिया जाएगा।
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डॉ. जयंत आहुजा, जिला सिविल सर्जन।
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