पानीपत। स्वास्थ्य विभाग पिछले आठ माह में महज 50 लोगों की ही सर्जरी कर पाया है। पिछले दो माह में 10 लोगों की भी मोतियाबिंद की सर्जरी नहीं हुई है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय भी सख्त है। वहां से सिविल सर्जन को सर्जरी बढ़ाने के सख्त दिशा निर्देश मिले हैं।
मोतियाबिंद की सर्जरी कम होने का प्रमुख कारण नेत्र रोग विशेषज्ञों की कमी व आयुष्मान योजना की ओर रोगियों का झुकाव है। मोतियाबिंद के रोगी आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में उच्च गुणवत्ता के लैंस के लिए सर्जरी करवा रहे हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी न के बराबर ही हो रही है। 2022 व 2023 में जिला नागरिक अस्पताल में 200 से अधिक लोगों की सर्जरी हुई है। फिलहाल जिला नागरिक अस्पताल में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। उनकी सप्ताह में दो दिन पोस्टमार्टम व कोर्ट ड्यूटी होती है। एक दिन उन्हें इमरजेंसी में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। सप्ताह में तीन दिन वह ओपीडी करते हैं। इसलिए मोतियाबिंद की सर्जरी नहीं कर पाते। दूसरे नेत्र रोग विशेषज्ञ की डीसी कार्यालय में ड्यूटी है। ओपीडी भी यहां अब काफी कम हो रही है। यहां हर रोज नेत्र रोग के लिए 122-130 मरीज आते हैं। एक डॉक्टर 70-80 मरीजों की ही जांच कर पाते हैं। लगभग 50 मरीज प्रतिदिन बिना इलाज ही घर लौट जाते हैं। जिला नागरिक अस्पताल में जिले भर से नेत्र रोगी इलाज के लिए आते हैं। जिले के किसी भी सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं है। मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधा भी सिर्फ जिला नागरिक अस्पताल में ही है। पिछले एक साल से जिला नागरिक अस्पताल में मोतियाबिंद की नाममात्र ही सर्जरी हो पा रहीं हैं।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि डिप्टी सिविल सर्जन भी नेत्र ओपीडी करते हैं। नेत्र रोगियों के इलाज संबंधी ऐसी कोई परेशानी सामने नहीं आई है। मोतियाबिंद की सर्जरी कम हो रही है। इसको गंभीरता से लिया जा रहा है। सर्जरी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।