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Panipat News: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पुलिस और शिक्षा विभाग से तलब की रिपोर्ट

Sat, 04 Oct 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। हरियाणा मानवाधिकारी आयोग पानीपत के जाटल रोड स्थित सृजन पब्लिक स्कूल में दूसरी कक्षा के सात वर्षीय बच्चे को होमवर्क न करने पर उल्टा लटकाकर पीटने के मामले को सख्त हो गया है। आयोग ने इस मामले में शिक्षा विभाग और पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को की जाएगी। आयोग ने कहा कि यह मामला वैधानिक कानून, संवैधानिक अधिकारों व अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के उल्लंघन को दर्शाता है। आयोग ने टिप्पणी की कि प्रधानाचार्या की ओर से दी गई सफाई उन्हें जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती। आयोग ने बच्चे को उल्टा लटका पीटने की घटना को क्रूर कृत्य बताया है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कहा कि सृजन पब्लिक स्कूल पानीपत से जुड़ी एक गंभीर घटना पिछले दिनों सामने आई है। आरोप हैं कि विद्यालय की प्रधानाचार्या रीना ने विद्यालय बस चालक अजय के साथ मिलकर होमवर्क पूरा न करने पर बच्चे को अमानवीय शारीरिक दंड दिया। बच्चे को कथित तौर पर खिड़की से उल्टा बांध दिया और बार-बार थप्पड़ मारे। यह घटना 13 अगस्त की है। जिसे स्कूल स्तर पर ही दबा लिया गया। बाद में इसका वीडियो बनाकर प्रसारित किया गया। शिकायतकर्ता बच्चे की माता को भी इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद पता चली। परिजनों ने आरोप लगाए कि विद्यालय प्रधानाचार्या का एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें वे छात्रों को थप्पड़ मारती और उनके कान पकड़ते नजर आ रही हैं। शिकायत है कि वह बच्चों से शौचालय और कक्षाओं की सफाई कराती थी। इसको न करने पर सजा देती थी।
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विद्यालय बच्चे की देखभाल संबंधित जिम्मेदारी में विफल

आयोग ने कहा कि इस मामले की जानकारी लगते ही हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा और दोनों सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया पानीपत पहुंचे। सरकारी विश्राम गृह में अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. पंकज और पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह से मामले की रिपोर्ट ली। आयोग ने अपने आदेश में लिखा है कि यह घटना संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (यूएनसीआरसी के प्रत्यक्ष उल्लंघन को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान प्रधानाचार्या ने स्वीकार किया कि उन्होंने बच्चे को अनुशासित करने के लिए चालक को बुलाया था, परंतु ऐसी क्रूरता की अनुमति देने से इनकार किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि विद्यालय स्टाफ ने बच्चे की सुरक्षा करने के बजाय उस पर गंभीर शारीरिक और मानसिक यातना पहुंचाई। चालक ने घटना की जानकारी देने पर बच्चे को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। जिससे भय और पीड़ा और बढ़ गई। शिकायतकर्ता का परिवार जब चालक से बात करने गया तो कुछ लोगों ने उन्हें धमकाया और मामले को आगे न बढ़ाने की चेतावनी दी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की है। यह विद्यालय की देखभाल संबंधी जिम्मेदारी में गंभीर विफलता को दर्शाता है।
आयोग ने कहा घटना विश्वास को करती कमजोर
जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि वे 29 सितंबर को पानीपत पहुंचे थे। इस मामले में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट ली थी। आरोपियों का आचरण मानवाधिकार एवं बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। सात वर्षीय बच्चे पर शारीरिक हमला, अवैध बंधन और धमकियां देकर उसकी गरिमा और अधिकारों का हनन किया गया। यह शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास को भी कमजोर करता है। आयोग ने कहा कि शिक्षा का आधार सकारात्मक अनुशासन, सहानुभूति और रचनात्मक मार्गदर्शन है। शारीरिक दंड आधुनिक शिक्षा पद्धति के विरुद्ध है और भारतीय कानून, अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों व मनोवैज्ञानिकों द्वारा निंदा की गई है। विद्यालय को बच्चों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए, न कि उन्हें अपमानित या शारीरिक रूप से दंडित करना। आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक, उपायुक्त पानीपत और जिला शिक्षा अधिकारी पानीपत अगली सुनवाई की तिथि 13 अक्तूबर से पहले आयोग के पास रिपोर्ट जमा करानी होगी।
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चार और पांच बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
आयोग ने शिक्षा विभाग से पांच और पुलिस से चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। शिक्षा विभाग को विद्यालय में आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 17 के अनुपालन की जांच करनी होगी। इसके साथ विद्यालय की अनुशासन नीतियों और बच्चों की सुरक्षा के उपायों की समीक्षा। पीड़ित बच्चे व परिवार को मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराना, सकारात्मक पालन-पोषण एवं बाल हितैषी अनुशासन को बढ़ावा देने के सुझाव और अवैध विद्यालयों की निगरानी व नियमन करने की रिपोर्ट मांगी है। पुलिस अधीक्षक को प्राथमिकी की स्थिति व धाराओं का विवरण प्रस्तुत करना होगा। पीड़ित, गवाहों और परिवार के बयान दर्ज करने की प्रगति, आरोपियों की गिरफ्तारी पर स्थिति रिपोर्ट और शिकायतकर्ता परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की कार्रवाई बतानी होगी।
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