पानीपत। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर सरकार ने खाने-पीने व दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की दरें तय कर दी हैं। इन सबके बीच पानीपत के उद्यमियों को आज भी हैंडलूम से संबंधित उत्पादों की दरों का इंतजार है। उद्यमियों ने साफ कहा कि उनकी दरें ही पानीपत की इंडस्ट्री का भाग्य तय करेंगी। इनमें इंडस्ट्री को मजबूती मिली तो खाने-पीने और दैनिक जरूरतों को तो उद्यमी और अन्य लोग खुद ही पूरा कर लेेंगे।
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जीएसटी के बारे में अभी तक पूरी जानकारी नहीं आई है। उद्योगपतियों को आयात-निर्यात या फिर रॉ मैटीरियल में छूट की जरूरत है। सरकार इस तक अभी पहुंच नहीं पाई है। उद्योग मजबूत होगा तो उद्यमी या उसका कर्मचारी खाने-पीने की वस्तु या फिर बिजली का खुद भुगतान कर लेगा।
रमेश वर्मा, प्रधान, हैंडलूम एक्सपोर्ट मेन्यूफैक्चरर एसोसिएशन, पानीपत।
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पानीपत हैंडलूम इंडस्ट्री है। जीएसटी में कॉटन यार्न, कॉटन वेस्ट व कॉटन फैबरिक के स्लैब आने पर ही कुछ कहा जा सकता है। इन सबके लागू होने पर उद्यमियों की प्रतिक्रिया असरदायक होंगी।
प्रीतम सचदेवा, चेयरमैन, हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स, पानीपत।
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पानीपत की इंडस्ट्री मेकर है। ऐसे में सोना, जूता, चप्पल समेत अन्य सामान पर जीएसटी तय करने का यहां की इंडस्ट्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कॉटन और यार्न पर जीएसटी की दर तय होने के बाद ही इंडस्ट्री के फायदे या नुकसान के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
विनोद ग्रोवर, प्रधान ओल्ड इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन, पानपीत।
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भारत से पहले चार अन्य देशों ने जीएसटी लागू की थी। इसके लागू होने के बाद उन देशों डीजीपी डाउन चली गई थी। पानीपत समेत प्रदेश और देश का व्यापारी जीएसटी को लेकर उत्साहित के साथ चिंतित है। उद्यमी पर काम और टैक्सों को बोझ एक साथ पड़ जाएगा।
यशपाल मलिक, चेयरमैन, फेडरेशन ऑफ स्माल स्केल इंडस्ट्री।
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जीएसटी लागू होने के बाद कुछ चीज सस्ती तो कुछ महंगी हो जाएंगी। प्रदेश में देसी घी पर 5.25 वैट है। इन सबके चलते घी काफी महंगा है। इस पर टैक्स एक जुलाई को 12 हो जाएगा। ऐसे में देसी घी और भी महंगा हो जाएगा। जीएसटी लागू होने के बाद चावल, मैदा, चीनी के रेट कम होगे। इस समय चीनी पर एक्साइज प्रतिशत है। यह घटकर पांच प्रतिशत हो जाएगी।
राकेश गर्ग, प्रधान, हरियाणा डिस्ट्रिब्यूटर एसोसिएशन, पानीपत।