पानीपत। शहर की हवा फिर खराब हो रही है। रविवार को उद्योग बंद होने के बावजूद एक्यूआई 195 पहुंच गया। पानीपत रविवार को प्रदेश का चौथा सबसे प्रदूषित शहर रहा। पानीपत का एक्यूआई 195 दर्ज किया गया। 230 एक्यूआई के साथ गुरुग्राम सबसे प्रदूषित और 226 एक्यूआई के साथ फरीदाबाद दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। अक्तूबर में दो बार शहर का एक्यूआई 200 पार हो चुका है। पानीपत का लगातार बढ़ रहे एक्यूआई का मुख्य कारण शहर की मुख्य सड़कों पर उड़ रही धूल है। अब 60 प्रतिशत बॉयलर बायोमास पर चल रहे हैं। अन्य बॉयलर चोरी छिपे कोयले पर चल रहे हैं। पिछले सप्ताह बरसात के कारण धूल के कण नीचे गिर गए थे। एक्यूआई तीन दिन तक ग्रीन जोन में रहा। अब पिछले तीन दिन से एक्यूआई यलो जोन में है। इसकी बड़ी वजह है कि अब तक ग्रैप का धरातल पर लागू न होना।
सीएक्यूएम एक अक्तूबर से एनसीआर में ग्रैप लागू कर चुका है। इसके तहत अब तक काम ही शुरू नहीं हुआ। प्रदूषण मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो अक्तूबर और नवंबर में एक्यूआई बढ़ने का मुख्य कारण हवा का दबाव है। दवाब के कारण धूल के कण और धुआं ऊपर नहीं उठ पाता है। इसलिए पीएम-10 बढ़ता है। अब त्योहारी सीजन में शहर में जाम की समस्या बढ़ गई है। ये भी एक्यूआई बढ़ने का बड़ा कारण है। दूसरी ओर जिन कोयला संचालित उद्योगों को सीएक्यूएम ने बंद कर दिया था, उनमें से अधिकतर बायोमास पर चलने लगे हैं, लेकिन अब भी 30 प्रतिशत उद्योग कोयले पर चोरी छिपे चलाए जा चल रहे हैं।
इन सड़कों पर पानी का छिड़काव जरूरी-
गोहाना रोड का काम एक साल से रुका हुआ है। प्रशासन ने रोड चौड़ी करने के लिए तीन माह पहले रोड को उखाड़ दिया था। अब यहां वाहन गुजरने के साथ धूल के गुबार उठते हैं।
- ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में कई सड़कें अब भी टूटी हैं। यहां लोड वाहन अधिक गुजरते हैं। इसलिए धूल उड़ती है।
- सिवाह गांव के पास हाईवे का काम चल रहा है। रोड के बीच में मिट्टी के ढेर हैं। यहां भी पानी का छिड़काव जरूरी है।
पराली जलाने की तीन लोकेशन मिली
पिछले सप्ताह कृषि विभाग को सैटेलाइट से पराली जलाने की तीन लोकेशन मिली थीं। लोकेशन के आधार पर जब विभाग की टीमें मौके पर गईं तो जगह नहीं मिली। हालांकि अब तक पराली जलाने का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
हम फैक्टरियों की जांच कर रहे हैं, दूसरे विभागों से भी बात करेंगे : आरओ
एक्यूआई बढ़ा है। हम फैक्टरियों की जांच कर रहे हैं। अब तक कोयला संचालित कोई उद्योग चलता नहीं मिला है। ग्रैप के तहत जिन दूसरे विभागों को काम करना है, उनसे बात की जाएगी और ग्रैप के तहत एक्टिविटी करेंगे।
- कमलजीत सिंह, आरओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड