पानीपत। टीडीआई सेक्टर 23 में हुए करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन खरीद-फरोख्त घोटाले में नया मोड़ सामने आया है। नगर निगम ने यूडीलैंड, पार्क, सड़क के रास्ते की प्राॅपर्टी आईडी टीडीआई के अलॉटमेंट लेटर और आवेदक के आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के आधार पर बनाई हैं। इसके बाद इसी प्रॉपर्टी आईडी, अलॉटमेंट लेटर के आधार पर आवेदक तहसील से सरकारी जमीन की रजिस्ट्री करवा लिए। नगर निगम अब प्रॉपर्टी आईडी और उनके बनाने के आधार के दस्तावेजों को खंगाला रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में नगर निगम ने जिला योजनाकार से टीडीआई सेक्टर 23 का लेआउट प्लान मांगा है। इसी प्लान और डिजिटल मैप से सरकारी जमीन पर बनाई गई और प्रॉपर्टी आईडी खोजी जाएंगी। जिसके बाद उनको भी रद्द किया जाएगा। प्रॉपर्टी आईडी रद्द करने के बाद ये सरकारी पोर्टल से हट जाएंगी। जिसके बाद बाकी के अन्य प्लाटों की रजिस्ट्री नहीं हो सकेंगी। दूसरा खुलासा ये हुआ है कि इस जमीन की जिला योजनाकार विभाग से एनओसी तक नहीं ली गई। वहीं अधिकारियों का भी ये मानना है कि जिस जमीन की खरीदफरोख्त की गई है उसके लिए एनओसी की आवश्यकता नहीं होती। एनओसी की आवश्यकता कृषि योग्य भूमि या 7-ए नियमों के दौरान होती है। जिससे स्पष्ट होता है कि इस सरकारी जमीन को डीटीपी से बिना एनओसी लिए ही खरीदा बेचा गया है। वहीं, मामले की जांच पुलिस भी कर रही है।
उधर इस मामले में शिकायतकर्ता जोगिंद्र स्वामी का कहना है कि इस मामले की जांच केवल विजिलेंस से होनी चाहिए। विजिलेंस जांच के लिए ही उन्होंने सरकार और अधिकारियों को शिकायत दी है। डीटीपी, तहसील, निगम के अधिकारी इस मामले में लीपापोती करना चाहते हैं। ये अधिकारी अपने घोटाले को कैसे बाहर दिखा सकते हैं। केवल विजिलेंस इस मामले की तह तक जाकर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज सकती है।
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निगम के डिजिटल मैप और धरातल के सर्वे के बाद होगा खुलासा
नगर निगम के पोर्टल पर डिजिटल मैप और टीडीआई के ले आउट प्लान में दर्शाई गई सरकारी जमीन का मिलान करने के बाद धरातल पर टीडीआई की जमीन का सर्वे करने के बाद इस बात का खुलासा होगा कि अब तक कितने गज के प्लाटों को काटा गया है। इनमें से कितने की प्रॉपर्टी आईडी या रजिस्ट्री हुई है। जिसके लिए नगर निगम प्रयासरत है।
वर्जन:
मामले की जांच की जा रही है। इसके लिए डीटीपी से भी सहयोग लिया जा रहा है। जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि कितनी सरकारी जमीन की प्रॉपर्टी आईडी बनाई है और कितनी जमीन बची हुई है।
योगेश तोमर, एटीपी, नगर निगम।