सात बच्चों की जिम्मेदारी और पहली बार अपराध की दलील खारिज, अदालत ने प्रोबेशन का लाभ देने से किया इन्कार
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश चौधरी की अदालत ने गांजा तस्करी के मामले में दोषी सुभाष को चार साल के कठोर कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी ने सात बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी और पहली बार अपराध करने का हवाला देकर नरमी बरतने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे सजा कम करने का आधार मानने से इन्कार कर दिया। जुर्माना नहीं भरने पर उसे छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
मामला 21 जनवरी 2021 का है। नारकोटिक सेल रोहतक के ईएसआई अमरजीत सिंह से मिली सूचना के आधार पर समालखा थाना पुलिस ने स्थानीय निवासी सुभाष को गोल्डन पार्क के पास पकड़ा था। नगरपालिका समालखा के तत्कालीन सचिव पवित्र गुलिया की मौजूदगी में राजपत्रित अधिकारी के समक्ष उसके प्लास्टिक के कट्टे की तलाशी ली गई। इसमें 9 किलो 220 ग्राम गांजा बरामद हुआ था, जिसे पॉलीथिन में 102 पुड़ियों में बांधा गया था। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
पारिवारिक जिम्मेदारी सजा में नरमी का आधार नहीं
सजा पर बहस के दौरान दोषी ने अदालत को बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और सात बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसी पर है। उसने पहली बार अपराध करने का हवाला देते हुए प्रोबेशन पर रिहा करने की मांग की।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एनडीपीएस मामलों में पारिवारिक जिम्मेदारियां और पहली बार अपराध करना अपने आप में सजा में नरमी का आधार नहीं हैं। ऐसे मामलों में प्रोबेशन का लाभ भी नहीं दिया जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषी को चार साल के कठोर कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।