पानीपत में बेटे की चाह में सुसरालियों ने एक विवाहिता को गर्भ में पल रही बच्ची समेत जलाकर मारने के प्रयास किया। इस प्रकरण में गर्भ में पल रही बच्ची की मौत हो गई और महिला को गंभीरावस्था में सिविल अस्पताल में दाखिल कराया। चिकित्सकों ने उसकी हालत को चिंताजनक बताया है। मायका पक्ष के लोगों ने ससुराल पक्ष के लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
नूरवाला की गीता कॉलोनी निवासी राकेश ने बताया कि उसने अपनी बेटी नीतू की शादी जून 2012 को शामली के गांव दुला खेड़ी के रहने वाले परविंदर के साथ की थी। उसने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोगों ने उसको पहले दिन से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
इसी दौरान वह गर्भवती हो गई। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने उसका अल्ट्रासाउंड करा लिया और उसके पेट में लड़की पलने की रिपोर्ट मिल गई। जिसके बाद उनकी प्रताड़ना बढ़ गई। वे गर्भ में पल रही लड़की को गिरवाना चाहते थे, लेकिन मीतू उनसे सहमत नहीं हुई। उसने आरोप लगाया कि 30 मई को सुसराल पक्ष के लोगों ने मीतू पर उसके ससुरालियों ने बाटू खेड़ी में ही केरोसिन छिड़क दिया और उसको गर्भ में पल रही बच्ची समेत जान से मारने का प्रयास किया। उसने उसके पति परविंदर, सास विद्या और जेठानी कोमल को इसमें शामिल होने के आरोप लगाए। उसने बताया कि मीतू के ससुराली मामला बिगड़ता देख उसको एक निजी अस्पताल में ले गए और काफी लंबे समय तक उसका इलाज कराया। इसी दौरान मीतू ने मृत लड़की को जन्म दिया। उसने आरोप लगाया कि मीतू को जलाने के प्रयास में ही गर्भ में पल रही बच्ची की मौत हो गई।
मायका पक्ष को सूचना तक नहीं दी
राकेश ने बताया कि ससुराल पक्ष के लोगों ने मीतू के साथ आगजनी की घटना को दबाए रखा और उनको इसकी कोई सूचना नहीं दी। वे उनसे फोन करते तो वे मीतू से अपने हाथों में मोबाइल लेकर बात करा देते। मीतू कुछ कहना चाहे तो उससे फोन हटा देते। वह श्राद्धों के दिनों में मीतू से मिलने उसके ससुराल चला गया। वह मीतू को देखकर हैरान रह गया और चुपचाप वापस आ गया। उसने परिवार के लोगों से सलाह की और मंगलवार को वहां पहुंचा। उन्होंने गांव के मौजिज लोगों के बीच में बात की और मीतू को लेकर सिविल अस्पताल पानीपत ले आया।