-एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एचडीएफसी लाइफ को आयोग ने दिया झटका
-आयोग ने मानसिक उत्पीड़न पर 11 हजार रुपये मुआवजा देने का दिया निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पिता के निधन के बाद कार लोन चुकाने के लिए अनुचित दबाव बनाने, फर्जी दस्तावेज का सहारा लेने और बेटे को जेल भिजवाने व घर-गाड़ी छीनने की धमकी देने वाले बैंक और बीमा कंपनी की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की सेवा में भारी खामी पाते हुए कड़ा आदेश सुनाया है।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा और सदस्यों की बेंच ने निर्देश दिया है कि मृतक के लोन की बकाया राशि उनके बीमा क्लेम से काटी जाए और बाकी बची हुई पूरी रकम नॉमिनी (बेटे) को लौटाई जाए। इसके साथ ही आयोग ने शिकायतकर्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में 11 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है।
बीमा होने के बावजूद बैंक ने किया परेशान
जींद के गांगोली गांव निवासी सोमदत्त ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता शिव कुमार ने 29 जुलाई 2022 को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की पानीपत शाखा से सेलेरियो कार के लिए 6.33 लाख रुपये का लोन लिया था। इसमें उनको सह-आवेदक बनाया था और लोन का बीमा एचडीएफसी लाइफ से कराया गया था। पिता नियमित रूप से 13,297 रुपये की मासिक किस्त भर रहे थे, लेकिन 22 अक्तूबर 2023 को उनका निधन हो गया। उन्होंने बैंक में डेथ सर्टिफिकेट जमा कराकर बीमा पॉलिसी से लोन सेटल करने की बात कही तो प्रबंधक ने फर्जी दस्तावेज बताए। उनसे पैसे मांगे और भुगतान न करने पर उन्हें जेल भिजवा देने की धमकी दी। उन्होंने घर और गाड़ी छीन लेने की धमकी दी।
आयोग ने कहा- नॉमिनी का हक खारिज नहीं कर सकते
बैंक व बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि पॉलिसी रिकॉर्ड में बीमित व्यक्ति के रूप में बेटे का नाम दर्ज था और मृतक केवल नॉमिनी थे। ऐसे में क्लेम नहीं दिया जा सकता। आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट कहा कि जब कार लोन मुख्य व्यक्ति शिव कुमार के नाम पर स्वीकृत था तो बीमा का लाभ भी उनके नॉमिनी को मिलना तय है। उपभोक्ता आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर इस आदेश को लागू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि तय समय में आदेश का पालन न करने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर या सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।