पानीपत। आचार्य लालमणि पांडेय ने कहा कि व्यक्ति को जीवन में गलत कर्मों से बचना चाहिए। सच्चे मन से भगवान राम की भक्ति करनी चाहिए। क्योंकि भगवान राम सबका उद्धार करते हैं। उन्होंने ये बात सेक्टर-17 में श्रीराम कथा के आठवें दिन बुधवार को कही। उन्होंने कहा कि कि गलत कर्मों से बचकर भगवान के बताए वैदिक मार्ग को अपनाना चाहिए।
आचार्य लालमणि पांडेय ने रामकथा में बताया कि भगवान राम चित्रकूट में माता सीता के साथ बैठे हैं। तभी वहां पर जयंत आता है और माता सीता के पैरों में चोंच का प्रयोग करते हैं। जिससे भगवान राम समझ जाते है कि इंद्र पुत्र जयंत ने माता सीता के पैरों में चोंच क्यों मारते है तो वे तुरंत सिंक का धनुषबाण बनाते हैं। जयंत को कोई बैठने को नहीं कहता है।
भगवान राम ऋषि अत्री के आश्रम में जाते हैं । इसी बीच भगवान राम विराज नामक राक्षक का वध करते हैं। फिर भगवान राम शरभंग ऋषि को आश्रम में जाते है, वहां पर ऋषियों की हड्डियों को देखकर प्रतिज्ञा करते हैं कि वे सभी राक्षसों को मारेंगे। भगवान राम संतों से मिलते हैं। अगस्त्य ऋषि के साथ भगवान राम पंचवटी आते है। वहीं सूर्पणखा का भगवान राम को देखती हैं और उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखती हैं।
ये सुनकर लक्ष्मण सूर्पपणखा का नाक काट देते हैं। जिसके बाद रावण माता सीता का हरण कर लेते है। माता सीता की खोज में भगवान राम सबरी के आश्रम में जाते हैं। वहां भगवान राम की सुग्रीव से मित्रता होती है। आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया भगवान राम राक्षसों का उद्धार करते हैं। भगवान राम की सच्चे मन से भक्ति करनी चाहिए। संवाद