बापौली। उझा स्थित मां बंगलामुखी माता मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को श्रीनाथ जी महाराज ने भक्तों को श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। प्रसंग सुन भाव विह्वल श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की और मंगल गाए। कथा व्यास ने कहा कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा विष्णु की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थीं। उन्होंने जब देव ऋषि नारद के मुख से श्री कृष्ण के रूप और गुणों की प्रशंसा सुनी तो मन ही मन श्री कृष्ण से विवाह का निश्चय किया। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से करना चाहता था। रुक्मिणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेश वाहक श्रीकृष्ण के पास भेजा। तब श्रीकृष्ण, शिशुपाल और उसके मित्र राजाओं को युद्ध में परास्त कर रुक्मिणी को द्वारिकापुरी ले गए। रुक्मी ने उनका मार्ग रोककर युद्ध के लिए ललकारा तो श्रीकृष्ण और बलराम ने रुक्मी को पराजित किया। इसके बाद द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मिणी से विवाह किया। कथा में मुख्य अतिथि के रूप में उद्योगपति एवं निगम पार्षद विजय जैन रहे। इस अवसर पर अश्रय मिश्रा, जतिन भुटानी, तरुण बजाज, दीपक खनेजा, स्मृति मिश्रा, पंकज मिगलानी, मनोज जुनेजा, संतोष मिश्रा, गुरमीत खुराना व सुनील झा मौजूद रहे।