पानीपत में बरसत रोड स्थित वूलन मिल में शुक्रवार सुबह करीब चार बजे संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। पड़ोसी के मकान तक आग की लपटें पहुंचीं तो उसने मिल मालिक को कॉल कर सूचना दी। मालिक मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक आग भीषण रूप ले चुकी थी। मालिक ने दमकल विभाग को आग की सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की करीब आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल की गाड़ियां अब तक 30 से अधिक चक्कर लगा चुकी है, लेकिन आठ घंटे बीत जाने के बावजूद आग पर काबू नहीं पा जा सका है।
मिल मालिक के अनुसार आग की वजह से उसका डेढ़ करोड़ रुपये नुकसान हुआ है। इकराम खान ने बताया कि उनकी बरसत रोड पर हर्ष गार्डन के पास खान वूलन मिल है, जिसमें वेस्ट कपड़े का काम किया जाता है। मिल में करीब 60 से 70 कर्मचारी काम करते हैं। वह शाम को छह बजे ही मिल को बंद कर घर चले जाते हैं। शुक्रवार सुबह चार बजे पड़ोसी ने कॉल कर उन्हें मिल में आग लगने की सूचना दी। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे तो पूरी मिल में आग फैल चुकी थी। उन्होंने दमकल विभाग को कॉल कर आग की सूचना दी, सूचना मिलते ही दमकल के दो स्टेशनों से कुल आठ गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग बुझाने में जुट गई।
शेड गिरा, दीवार में आ गई दरार
मिल मालिक ने बताया कि आग की वजह से उनकी फैक्टरी कंडम हो चुकी है। सभी शेड गिर चुके हैं, महज दीवार खड़ी है, लेकिन उनमें भी दरार आ चुकी है। आग की वजह से उनका करीब एक करोड़ के माल का नुकसान हुआ है, जबकि 50 लाख का नुकसान बिल्डिंग कंडम होने से हुआ है, जिसकी भरपाई करना अब नामुमकिन है।
पड़ोसी बोलाः आग मकान तक पहुंची तो खुली आंख
पड़ोसी ने बताया कि वह अपने कमरे में सो रहा था, इसी बीच उसे अचानक गर्मी लगने लगी। कमरा कुछ ही देर में धुएं से भर गया। उसे पहले अपने ही मकान में आग लगने का शक हुआ, लेकिन बाहर निकलकर देखा तो वूलन मिल में आग लगी हुई थी, जिसके बाद उसने मालिक को कॉल कर सूचना दी।
तीन स्टेशनों से पहुंची गाड़ियां
आग की सूचना पर दमकल के तीन स्टेशनों से आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। जिनमें दो गाड़ियां हुडा कार्यालय, तीन गाड़ियां लालबत्ती कार्यालय और तीन गाड़ियां मुख्य कार्यालय की हैं। दमकलकर्मी आजाद सिंह ने बताया कि आस-पास पानी भरने के लिए कोई प्वाइंट नहीं था, इसलिए वह टोल से पानी भरकर ला रहे हैं।
क्यों नहीं बुझ पा रही आग
दमकल कर्मी ने बताया कि मिल में अलग-अलग तरह का कपड़ा पड़ा है। कुछ प्लास्टिक टाइप कपड़ा है, इसी प्लास्टिक कपड़े ने पिघलकर गांठों के ऊपर अपनी प्लास्टिक की लेयर बना ली है, जिस वजह से पानी असर नहीं कर रहा है। अब जेसीबी को बुलाया गया है, कपड़े की गांठों को अलग-अलग किया जा रहा है।