पानीपत। मौसम के उतार चढ़ाव में बुखार धीरे-धीरे पांव पसार रहा है। स्वास्थ्य विभाग के एक से 14 जून तक चलाए रैपिड फीवर सर्वे में 4966 व्यक्ति संदिग्ध बुखार के मिले हैं। इसके साथ 48 मरीजों का रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किया है। सीजन की शुरुआत में ही बुखार के
इतने मरीज मिलना आगे मौसमी बीमारियों के लिए खतरे के संकेत हैं। स्वास्थ्य विभाग इन सबके किसी प्रकार की बीमारी के ब्रेक होने से पहले ही नियंत्रण का दावा कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जून महीने के पहले 14 दिन रैपिड फीवर सर्वे किया। इसके लिए जिले में 315 टीमें लगाई थी।
जो हर घर तक पहुंची थी और बुखार के संदिग्ध लोगों जांच की। इनको मलेरिया-डेंगू के बचाव के लिए जागरूक किया। साथ ही बुखार की पट्टिका बनाकर इलाज भी किया। इन टीमों ने 14 दिन में 1,83,560 लोगों का सर्वे किया।
इनमें 4966 बुखार के संदिग्ध मरीज मिले। 48 मरीजों की आरडीटी टेस्ट किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जून महीने को मलेरिया माह के रूप में मनाया। इस बार विभाग की टीमों 1,52,477 घरों में लार्वा की जांच की है। इनमें से 535 घरों में लार्वा मिला। विभाग ने इनको नोटिस दिया। इसके साथ जागरूक किया।
लोगों में जागरूकता आई और दोबारा जांच में लार्वा नहीं मिला। स्वास्थ्यकर्मी सतबीर सिंह ने बताया कि सर्वे के दौरान घर-घर जाकर पानी की टंकी, फ्रीज की ट्रे, ड्रम, हौदी में डेंगू के लार्वा की जांच की गई।
लोगों को पंपलेट बांटकर मलेरिया-डेंगू से बचाव के लिए जागरूक किया। मच्छर जनित बीमारियों को लोगो के सहयोग के साथ ही रोका जा सकता है। क्योंकि मच्छर रुके हुए पानी, छत पर रखे बर्तन, टायर, गमले, फ्रीज की ट्रे, घरों के पास बने गड्ढों, नालियों में पनपते है।
इसलिए लोगों को बुखार होते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने रक्त की जांच जरूर करानी चाहिए और रोग की पुष्टि होने पर इलाज जरूर कराना चाहिए।
मच्छरों से बचाव के लिए आसपास पानी जमा न होने दे।
जमा गंदे पानी में काला तेल डालना चाहिए। कूलर के पानी को सप्ताह में एक बार जरूर बदलना चाहिए। रात को मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए।