शाहाबाद। एमएसपी पर सूरजमुखी की खरीद की मांग को लेकर मंगलवार को आखिरकार किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। भाकियू के बैनर तले किसानों ने मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व में महापंचायत की। इस दौरान मौके पर पहुंचे डीसी और एसपी ने किसानों को समझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए रास्ता बदलकर किसान दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर पहुंच गए और जाम लगा दिया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे से देर शाम तक किसान हाईवे पर डटे रहे और पुलिसबल तैनात रहा।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बराड़ा रोड पर शहीद उधम सिंह हाल में किसानों की महापंचायत शुरू हुई। यहां किसानों से चरचा के बाद गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रशासन को 12 बजे तक का अल्टीमेटम दिया। साथ ही कहा कि अगर सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक संदेश है तो प्रशासन की ओर से किसानों तक पहुंचाया जाए। इस बीच गुरनाम सिंह चढूनी ने एसडीएम कपिल शर्मा और डीएसपी रणधीर सिंह के साथ बैठक भी की, लेकिन यह बेनतीजा रही। उसके बाद करीब 12.15 बजे डीसी शांतनु शर्मा और एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया किसानों के बीच पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। जब यह दोनों अधिकारी भी किसानों को आश्वस्त नहीं कर पाए तो गुरनाम सिंह चढूनी ने सड़क जाम करने की घोषणा कर दी।
इससे पहले किसानों को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन हजारों किसान शहीद उधम सिंह स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के बाद पुल की करीब 30 फीट चढ़ाई चढ़ने के बाद नेशनल हाईवे पर जा पहुंचे और दोनों तरफ से जाम कर दिया। ऐसे में किसानों को रोकने के पुलिस के सभी प्रबंध धरे के धरे रह गए। किसानों की रणनीति समझने में पुलिस प्रशासन नाकाम रहा। इस दौरान डीएसपी रणधीर सिंह स्वयं आंदोलनकारी किसानों के पीछे भागते नजर आए, लेकिन उससे पहले किसान अपने मिशन में कामयाब हो गये। हाईवे जाम करने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों का नेतृत्व कर रहे गुरनाम सिंह चढूनी ने ऐलान किया है कि उन्हें हाईवे से हटाने के लिए बल प्रयोग किया गया तो पूरे प्रदेश को बंद कर दिया जाएगा।
एमएसपी पर खरीद शुरू होने पर ही हटेंगे : चढूनी
थाना शाहाबाद के सामने नेशनल हाईवे पर किसानों के बीच बैठे गुरनाम सिंह चढूनी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 10 मई से मंडियों में सूरजमुखी की आवक शुरू हो गई थी। किसान पंखा आदि लगवाने के बाद फसल वापस ले जाने को मजबूर हैं जिससे व्यर्थ का आर्थिक बोझ किसानों पर पड़ रहा है।
चढूनी ने कहा कि 30 मई को भावांतर योजना के तहत फसल की खरीद का पत्र सरकार की तरफ से जारी हुआ था, जो किसी भी किसान को मंजूर नहीं है। अब भी किसानों की एक ही मांग है कि उनकी फसल को एमएसपी पर खरीदा जाए। जब तक सरकार एमएसपी पर खरीद नहीं करती, तब तक किसान सड़क नहीं छोड़ेंगे। बेशक पुलिस जो चाहे कार्रवाई करे। जबरन उठाया तो पूरे प्रदेश को बंद कर दिया जाएगा। दो जून को चंडीगढ़ में शिक्षा मंत्री सहित पांच प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसान यूनियन के सात सदस्यों की बैठक बेनतीजा रही थी। उस दौरान भाकियू ने पांच जून तक का अल्टीमेटम प्रशासन को दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
नेशनल हाईवे पर ही डेरा कार सेवा शाहाबाद द्वारा किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई। दोपहर से सायं तक सड़क पर ही किसानों ने लेट कर विश्राम किया। दूसरी ओर पुलिस जवानों ने थाना परिसर में दोपहर का खाना खाया और पुन: अपनी डयूटी पर डट गये। वहीं दिनभर गुप्तचर विभाग भी सक्रिय रहा और पल-पल की अपडेट अधिकारियों को देता रहा।
- किसानों को सड़क पर जाने से रोकने के लिए प्रशासन की ओर से नौ डयूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे तो वहीं 700 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इसके बावजूद किसान हाईवे पर जाम लगाने में सफल रहे।