अंबाला सिटी। जिले में भू-जल स्तर गिरा है। पिछले दस वर्ष में सबसे ज्यादा भू-जल स्तर जिले के साहा खंड में घटा है। यह माइनस 10.14 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। अंबाला में भू-जल का दोहन ज्यादा और रिचार्ज कम है। जिस कारण भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
यह वह भू-जल स्तर है। जिसे सिंचाई विभाग के तहत जल विज्ञान ने अलग-अलग एरिया में मौजूद ऑब्जर्वेशन पॉइंट यानि कुओं से समय-समय पर रिकॉर्ड किया है। इसमें साहा खंड की हालत सबसे खराब है। वहीं, बीते दिनों सरकार ने जिले में 10 करोड़ 7 लाख 18 हजार रुपये की लागत से अमृत प्लस सरोवर के तहत तेपला, पंजोखरा साहिब, थंबड, डेरा, मोहड़ी, ठाकुरपुरा, बाकरपुर, लौटां में तालाबों का नवीनीकरण कर उद्घाटन किया गया।
इसी तरह अंबाला जिले की कुल एक लाख 10 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि से करीब 85 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपाई की जाती है। धान की फसल लगभग भू-जल पर निर्भर करती है। जिले में नग्गल व आसपास के इलाकों में ही भाखड़ा नहर से नहरी पानी उपलब्ध है। इसके अलावा बराड़ा, नारायणगढ़, साहा, शहजादपुर व मुलाना जैसे इलाकों में नहरी पानी उपलब्ध नहीं है। जिससे लगातार भू-जल का दोहन हो रहा है। इसके अलावा पानी का दुरुपयोग भी इसकी वजह है।
भू-जल के आंकड़े पर एक नजर
खंड जून 2013 जून 2023 भू-जल का स्तर गिरा
अंबाला वन 4.64 6.34 -1.70
अंबाला टू 5.39 7.08 -1.69
बराड़ा 13.38 15.47 -2.09
साहा 13.62 23.76 -10.14
नारायणगढ़ 14.61 20.17 -5.56
शहजादपुर 9.81 12.27 -2.46
नोट : भू-जल स्तर मीटर में रिकॉर्ड किया गया है।
जमीन पर पढ़ता है दबाव : जसविंद्र सैनी
कृषि विभाग से उप निदेशक डॉ. जसविंद्र सैनी ने बताया कि किसान एक ही फसल उगाते हैं तो एक ही समय में भू-जल की खपत बढ़ती है। जिससे जमीन पर भी दबाव पड़ता है, इसलिए अलग-अलग फसलें उगानी चाहिए। हर फसल की पानी की जरूरत अलग-अलग होती है। परंपरागत फसलों के अलावा कम पानी वाली फसलें दलहन व तिलहन को बढ़ावा देना होगा। जैसे बाजरा मोटे अनाज वाली फसल में कम पानी लगता है।
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दूसरी फसल उगाने पर सरकार देती है सब्सिडी
मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत धान के अलावा अगर किसान दूसरी फसल उगाते हैं तो सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। धान की सीधी बिजाई से भी पानी की बचत होती है। ड्रिप सिंचाई विधि से भी पानी का बचाव संभव है। विशेष कर किसानों को चाहिए कि खेत की मेढ़ ऊंची रखें जिससे बारिश में पानी खेत में जमा हो और गांव के तालाब भी जल संशोधन का बड़ा स्रोत बन सकें। इन जोहड़ और तालाबों की तरफ भी ध्यान देना जरूरी है।
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भूजल स्तर मापने में पीजोमीटर सहायक : अभिनव गिरी
जल विज्ञान से तकनीकी अधिकारी अभिनव गिरी ने बताया कि पहले कुओं से समय-समय पर भू-जल स्तर रिकॉर्ड किया गया है। पिछले वर्ष जिले में 23 पीजोमीटर लगाए गए हैं। इस पीजोमीटर से ऑटोमेटिक तरीके से भू-जल स्तर मापा जा रहा है। इससे सटीक भू-जल स्तर और क्वालिटी का पता चलती है। जिले में साहा खंड में भू-जल स्तर दूसरे खंड के मुकाबले ज्यादा कम रिकॉर्ड किया गया हैसे