पानीपत। मिर्गी के दौरों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। मिर्गी के अचानक केस बढ़ रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में जिला नागरिक अस्पताल में नौ हजार से अधिक मिर्गी दौरे के मरीज पहुंच चुके हैं। पिछले छह माह में ही मिर्गी दौरे के लगभग 2100 मरीज आ चुके हैं। अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन दो से तीन मिर्गी रोगी पहुंच रहे हैं। मोबाइल, कंप्यूटर का अधिक प्रयोग व अधिक टीवी देखना इस रोग को बढ़ावा दे रहा है। मिर्गी रोग जानलेवा साबित हो रहा है।
पिछले पांच दिन में दो ऐसे चिंताजनक केस सामने आए हैं। जिन्होंने लोगों को मिर्गी के खिलाफ जागरूक होने के लिए मजबूर कर दिया है। पांच दिन पहले भारत नगर में चाय बनाते हुए एक महिला को मिर्गी का दौरा पड़ा, वह जलती गैस पर गिर गई और गंभीर रूप से झुलस गई। तीन दिन पहले बाबरपुर मंडी निवासी युवक को चलती मोटरसाइकिल पर दौरा पड़ गया। उसकी मोटरसाइकिल डिवाइडर से टकराकर गिर गई। युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसको जिला नागरिक अस्पताल में दाखिल कराया गया था। डॉक्टर मिर्गी के रोगियों को कम से कम लगातार तीन साल तक इलाज कराने की सलाह दे रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल ने बताया कि जिले की 15 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसे जीवन में एक बार मिर्गी के दौरे जरूर पड़ते हैं। वर्तमान में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन की स्क्रीन को अधिक देर तक देखना, नींद पूरी नहीं होने से भी रोगी बढ़े हैं। इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके लोगों को दोबारा दौरे पड़ने के मामले देखे गए हैं। रोग का इलाज संभव है, कम से कम तीन साल दवा का सेवन करना पड़ता है। मिर्गी की बीमारी का मुख्य कारण तनाव है। अधिकतर यह बीमारी 12 से 18 वर्ष के बीच होती है। मिर्गी की दवाइयां कम से कम तीन साल तक खानी होती है। किसी मरीज को अधिक दौरे पड़ते हैं तो पांच-छह साल तक भी इलाज चल सकता है। मिर्गी रोग से बचाव के इंजेक्शन, नोजल स्प्रे भी आ रही है। अन्य रोगों की तरह इस रोग में भी मरीज को चिकित्सक के बताए अनुसार मेडिसिन का सेवन करना पड़ता है, दिनचर्या में सुधार करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
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मिर्गी रोग का कारण-
-जन्म के समय बच्चे का न रोना।
-रक्त में कैल्शियम या शुगर की मात्रा कम हो जाना।
-सिर में चोट, अनुवांशिक बीमारियां
- दिमाग की संरचना में कमी या खराबी।
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ये हैं मिर्गी के लक्षण :
-हाथ-पैरों में जकड़न व कंपन।
-आंखों का ठहर जाना।
-बातचीत न कर पाना।
-मुंह में लार या झाग निकलना।
-एक हाथ या पैर अकड़ना, टेढ़ा हो जाना।
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मिर्गी के रोगियों के परिजन रखें ध्यान :
-रोगी को अकेला कभी न छोड़ें।
-दौरा आने पर नाक पर दवा का स्प्रे करें।
-रोगी नियमित दवा का सेवन करें।
-रोगी तालाब-नदी, हौदी में न नहाएं।
-अधिक शोर वाले स्थान पर नहीं जाएं।
-रोगी का आत्मविश्वास बढ़ाते रहें।
-रोगी लाइटों की चकाचौंध से दूर रहे।
-मरीज की गर्दन में लिपटे कपड़ों को हटा दें।