पानीपत। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शुक्रवार को पंचायती राज चुनाव की घोषणा हो र्गई। इसके तुरंत बाद आचार संहिता भी लागू हो गई। आचार संहिता केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही लागू होगी। इसका शहरी क्षेत्र में असर नहीं होगा। पहले चरण में दो नवंबर को पानीपत के 178 गांवों में सरपंच और पंच का चुनाव होगा। इनके चुनाव परिणाम मतदान के तुरंत बाद आएंगे। साथ ही 30 अक्तूबर को जिला परिषद के तहत 17 वार्डों के जिला पार्षदों और छह ब्लॉक समितियों के सदस्यों के चुनाव भी होंगे। इनके परिणाम प्रदेश के 22 जिलों के साथ घोषित होंगे। दोनों चुनावों के लिए ग्रामीणों को अलग-अलग वोट देने होंगे।
यूं तो जिले में 198 गांव हैं, लेकिन 20 गांव ऐसे हैं जो दूसरी पंचायतों में सम्मलित होते आ रहे हैं। इनमें जनसंख्या इतनी नहीं है कि इनमें अलग पंचायत का गठन हो सके। इसके बाद अब जिले में कुल 178 गांवों में पंचायत चुनाव होंगे।
इस बार खास बात यह है कि तीन नई ग्राम पंचायतें अस्तित्व में आई हैं। पिछले पंचायत चुनाव में 175 ग्राम पंचायतों में चुनाव हुए थे। इस बार 178 ग्रांवों में चुनाव होंगे। पानीपत ब्लॉक से दो और सनौली ब्लॉक से एक नया गांव जुड़ा हैं। इन गांवों के लोग पहली बार अपनी सरकार चुनेंगे। पानीपत ब्लॉक से डेरा सिकलीगर और छोटी रजापुर नई पंचायत बनी हैं जबकि सनौली ब्लॉक से रामडा-आर को शामिल किया गया है।
इस चुनाव में जिले के 457632 मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनेंगे। इनमें 244068 पुरुष और 213551 महिला मतदाता समेत 13 अन्य लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
इसके लिए जिले में 529 बूथ बनाएं जाएंगे। इनमें 121 बूथ संवेदनशील और 187 बूथ अति संवेदनशील के श्रेणी में रखे गए हैं।
- जिले में कुल 178 गांवों में पंचायत चुनाव होंगे। हर गांव में एक सरपंच और वार्ड वार एक पंच को सीधे तौर पर वोट डालकर चुना जाएगा। ये सभी गांव जिले की छह ब्लॉक समितियों में आते हैं। इनमें पानीपत, बापौली, इसराना, समालखा, इसराना और मतलौडा शामिल हैं। सभी ब्लॉक समितियों से एक ब्लॉक समिति चैयरमैन होगा जबकि हर समिति में 28 से 30 गांव आते हैं।
- हर ब्लॉक में ग्राम वार एक ब्लॉक समिति सदस्य चयनित होगा। सभी चयनित सदस्य मिलकर ब्लॉक समिति चैयरमैन को चुनेंगे। दूसरी ओर जिला परिषद की बात करें तो जिले के सभी गांवों को 17 वार्डों में बांटा गया है। सभी वार्डों के अधीन आठ से 12 गांव आते हैं। इनका चुनाव भी सीधे तौर पर होगा। जिला परिषद के चेयरमैन को जिला पार्षद चुनेंगे। अबकी बार पानीपत जिला परिषद की चेयरमैन का पद भी महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
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20 महीनों के इंतजार के बाद हुई घोषणा :
प्रदेश के पंचायती राज में फरवरी 2016 में अंतिम बार चुनाव हुए थे। इसके बाद इनका कार्यकाल फरवरी 2021 में पूरा हो गया था। इसके बाद चुनाव की तारीख पर तारीख मिलती रही, लेकिन घोषणा नहीं हुई। अब करीब 20 महीने बाद चुनावों की घोषणा हुई है। आयोग प्रदेश में पंचायती राज के चुनावों को अलग-अलग चरणों में आयोजित करने जा रहा है। इसके पहले चरण में प्रदेश के 10 जिलों में भिवानी, फतेहाबाद, झज्जर, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, नूंह, पंचकूला, यमुनानगर और पानीपत में पहले चरण में चुनाव होंगे।
ये हैं अहम तारीखें :
- 30 अक्तूबर : जिला परिषद और ब्लॉक समिति के चुनाव होंगे
- 02 नवंबर : सरपंच और पंच के लिए चुनाव होंगे
- 08 अक्तूबर : चुनाव नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा
- 14 से 18 अक्तूबर : उम्मीदवार नामांकन पत्र भरेंगे
- 20 अक्तूबर : नामांकन पत्रों की छंटनी होगी
- 21 अक्तूबर : नामांकन वापस ले सकते हैं
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उम्मीदवार ये कर सकेंगे खर्च
चुुनाव आयोग ने पंच को चुनाव में 50 हजार रुपये, सरपंच को दो लाख रुपये, ब्लॉक समिति को 3.60 लाख रुपये और जिला परिषद को छह लाख रुपये चुनावी खर्च करने की अनुमति दी है। इसके अतिरिक्त चुनाव खर्च पर पाबंदी रहेगी। जिसका सरकार को हिसाब किताब भी देना होगा।
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यह शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य
पंच की अनारक्षित सीट पर 10वीं पास, महिला एवं एससी आठवीं पास जबकि एससी वर्ग से महिला उम्मीदवार को पांचवीं पास होना अनिवार्य है। सरपंच की अनारक्षित सीट के लिए 10वीं पास, महिला एवं एससी वर्ग को 8वीं पास और एससी वर्ग की महिला उम्मीदवार को आठवीं पास होना जरूरी है। ब्लॉक समिति की बात की जाए तो समिति की अनारक्षित सीट पर उम्मीदवार को 10वीं पास, महिला एवं एससी वर्ग के लिए आठवीं पास और एससी वर्ग की महिला के लिए आठवीं पास को अनिवार्य किया गया है। जिला परिषद चुनाव में वार्ड पार्षद एवं सदस्य के लिए अनारक्षित सीट पर 10वीं पास, महिला एवं एससी के लिए आठवीं पास और एससी वर्ग की महिला के लिए आठवीं पास होना अनिवार्य है।