पंचायती राज संस्थाओं के प्रथम चरण में पानीपत व इसराना खंड को पढ़ी लिखी ही नहीं बल्कि युवा पंचायत भी मिली। दोनों पंचायतों में करीब 80 प्रतिशत युवाओं ने बाजी मारी।
इन गांवों में 60 साल की उम्र से ज्यादा का केवल बांध गांव को ही सरपंच मिला है। वहीं चुनाव के बाद पाथरी गांव के सरपंच व कचरौली के वार्ड-तीन के पंच को लेकर विवाद बना रहा।
पाथरी गांव के एक प्रत्याशी ने एक वोट से जीत होने के बाद हार का रिजल्ट देने का आरोप लगाया है। वहीं कचरौली गांव में पंच को लेकर टाई कराई गई।
सरकार का पंचायती राज संस्थाओं में शिक्षा की शर्त को लागू करने का व्यापक बदलाव देखा गया। शिक्षा की शर्त लगने के बाद युवा चेहरे ग्राम पंचायत के पंच व सरपंच के लिए आगे आए। युवाओं में ही कड़ा मुकाबला रहा। कई जगह युवा चेहरे खिलकर सामने आए और विकास का भी दंभ भरा।
इस बार आठवीं पास भी सात
पंचायती राज संस्थाओं के प्रथम चरण में पानीपत व इसराना ब्लाक में एक भी अनपढ़ पंचायती नहीं आया। चुनाव में सरकार की शिक्षा का शर्त लागू होने का पूरा असर देखा गया।
दोनों ब्लाकों में 65 पंचायत बनी। इनमें 36 पुरुष व 29 महिला सरपंच बनकर सामने आई। एससी वर्म के 16, बीसी एवं ओबीसी के सात और सामान्य व वर्ग के 42 सरपंच बनकर आए। इनमें आठवीं पास सात, दसवीं पास 40, 12वीं पास 10 और ग्रेजुएट व इससे अधिक आठ सरपंच आए।
खंड आठवीं पास दसवीं पास 12वीं पास ग्रेजुएट व इससे अधिक
इसराना 04 21 04 03
पानीपत 03 19 06 05
पिछले पंचायती चुनाव 58 अनपढ़ बने थे सरपंच
पिछले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में जिले में करीब 58 अनपढ़ लोगों को चौधरी मिली थी। चौथे पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के डाटा पर नजर डाले तो जिला परिषद के 14 पदों में एक अनपढ़ था। इनमें तीन अंडर मैट्रिक, सात मैट्रिक, दो इंटरमीडिएट व तीन स्नातक पास थे। जिले की 167 पंचायतों में 35 सरपंच अनपढ़, 47 अंडरमैट्रिक, 12 स्नातक, दो पीजी व एक मेडिकल डॉक्टर था। पंचायत समिति के पांच ब्लाक में 111 उम्मीदवार थे। इनमें 22 अनपढ़, 26 अंडर मैट्रिक, 31 मैट्रिक, 22 इंटरमीडिएट व 10 स्नातक पास थे।
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नोट: पाथरी समाचार वर्जन
वर्जन
पंचायती राज संस्थाओं में प्रथम चरण के चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गए हैं। पाथरी गांव में राजेश ने जीत के बाद हार दिखाने का आरोप लगाया है। ऐसे आरोप निराधार हैं। ग्रामीणों के सामने ईवीएम से गिनती की गई थी। दोनों प्रत्याशियों दीपक व राजेश के बराबर-बराबर मतदान आए थे। उन सबकी रजामंदी पर ही टॉस कराया गया था। जिसमें दीपक का भाग्य में सरपंची आ गई। इस मामले में अब कुछ नहीं हो सकता।
रुपेंद्र मलिक, डीडीपीओ, पानीपत।