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मां कूष्मांडा के गूंजे जयकारे

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पानीपत। मन्नत की घंटी:- देवी मंदिर नवरात्र पर जहां रोज हजारों की संख्या में लोग माथा टेकने आते है, ? - फोटो : Panipat
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पानीपत। नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की गई। भक्तों ने मंदिरों में जाकर पूजा की और माता का आशीर्वाद लिया। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही, घरों में हवन हुआ। मंदिरों में दिनभर मां के जयकारे गूंजते रहे। उधर, पानीपत के ऐतिहासिक देवी मंदिर के प्रधान काकू बंसल ने बताया कि देवी मंदिर सहित माता के दरबार को फूल-माला और लाल चुनरी से सजाया गया है।
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नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप कूष्मांडा देवी की पूजा का विधान हैं। इनकी आठ भुजाएं है इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। इनके शरीर की कांति व प्रभा सूर्य के समान दैदीप्यमान है। ये अपनी अष्ट भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा धारण आदि सभी चीजें करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब चारों ओर अंधकार था तो इन्हीं के द्वारा ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी। इन्हीं के प्रकाश व तेज से दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं। यही सृष्टि की आदिस्वरूपा मां आदिशक्ति हैं।
सजे प्रमुख मंदिर, भक्तों ने किए मां के दर्शन
नवरात्र को लेकर शहर के ऐतिहासिक व प्रसिद्ध देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, अवध धाम मंदिर, श्री राधा-कृष्ण मंदिर, काशी गिरी मंदिर सहित शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में माता के दरबार को फूल-माला और रंगीन लाइट से सजाया गया है। मंदिरों में देवी के चैथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से की। शाम को मंदिरों में भजन कीर्तन हुए। मां का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए। किसी ने मंदिर के अंदर तो किसी ने झांकी से ही माता का दर्शन व पूजन किया। मां के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे।
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बाजारों में रही भीड़
नवरात्र पर्व पर अनुष्ठान के लिए शहरवासियों ने बाजारों में पूजन सामग्री व प्रसाद की खरीदारी की। कुम्हारों के यहां भी कलश और दीये की बिक्री हुई। पूजन सामग्री की दुकानों पर नैवेद्य की जबर्दस्त बिक्री रही। महिलाएं भी मां के लिए सजावट की सामान और विशेष रूप से लाल चुनरी खरीदती नजर आईं। फल की दुकानों पर भी भीड़ रही।
आज मां स्कंदमाता का होगा पूजन
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। यह कमल के आसान पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। स्कंदमाता की साधना से साधकों को आरोग्य, बुद्धिमता तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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पानीपत। देवी मंदिर में देवी मां के दर्शन कर माथा टेकते हुए।- फोटो : Panipat

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