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पेयजल की शुद्धता पर संशय

Wed, 06 Nov 2013 11:53 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
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जल ही जीवन है। यह संदेश अकसर सुनने को मिलता है, लेकिन हम सभी के लिए जल तभी जीवन बन सकता है, जब वह शुद्ध होगा। केमिकल युक्त और दूषित जल सभी के जीवन को संकट में डाल सकता है। इस संकट से बचने के लिए मालूम होना चाहिए कि पानी पीने लायक है अथवा नहीं।
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इसे ध्यान में रखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी की शुद्धता की जांच करने के लिए एचटूएस किट बांटने की योजना बनाई थी। इस किट के इस्तेमाल से कोई भी खुद ही आसानी से पानी की शुद्धता को जांच सकता है। लेकिन विभाग ने लापरवाही बरतते हुए सालभर में कोई भी किट नहीं बांटी। इसके विपरीत अधिकारी इस बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं।

अंतिम तारीख तक नहीं बंटी किट
जन स्वास्थ्य विभाग को साल भर में ग्रामीण क्षेत्राें में एचटूएस की 1800 किट बांटनी थी। किट बांटने की अंतिम तारीख भी 31 अक्तूबर थी। अब यह किट बांटने की अंतिम तारीख भी निकल चुकी है। विभाग अभी तक कुंभकरणी नींद में ही है। इस काम के लिए नियुक्त कर्मियाें की मानें तो विभाग की तरफ से अभी तक एक भी किट नहीं बांटी है।
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बिना किट कैसे जांचेंगे शुद्धता
अब तक ग्रामीणों को पानी शुद्धता जांचने के लिए एचटूएस किट नहीं मिली है। किट नहीं मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कैसे पानी की शुद्धता की जांच होगी। समय के साथ-साथ जमीन का पानी भी प्रभावित होता जा रहा है। इसके अलावा गांव और शहरों की गलियों पर जगह-जगह पानी की सप्लाई वाली पाइप लाइन लीक है। ऐसे में लीकेज वाली जगह पर गंदा पानी एकत्रित हो जाता है। बाद में वही पानी सप्लाई के माध्यम से घरों में आता है। इस तरह से लोग गंदा पानी पीकर बीमार पड़ जाते हैं।

इसके अलावा खेतों मेें पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर का अंधाधुंध इस्तेमाल, जगह-जगह लगे कारखाने और फैक्टिरियों के कारण भी भूमिगत पेयजल प्रभावित हो रहा है। यह सभी के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है, चाहे वह इनसान हो या जानवर, पेड़ हों या फसल। इसी बात का ध्यान में रखते हुए लोेगों को एचटूएस की किट दी जाती है। ग्रामीणों को एचटूएस का इस्तेमाल तो दूर, इसके बारे में पता ही नहीं है। इस तरह से जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।

यह है एचटूएस किट
एचटूएस किट का इस्तेमाल पानी की शुद्धता मापने केे लिए किया जाता है। इस किट का इस्तेमाल बेहद आसान है। कोई थी आदमी पहले अच्छे तरीके से हाथ साफ करके सावधानीपूर्वक किट का ढक्कन खोलता है। इसके बाद इसके मुंह पर बिना हाथ लगाए ही सप्लाई वाली टूंटी से इसमें पानी डालना होता है। पानी की मात्रा के लिए एक निशान बनाया है। किट में पानी डालने के बाद उसका ढक्कन बंद करके रख दिया जाता है। 48 घंटे बाद अगर पानी का रंग काला पड़ जाता है तो समझो पानी पीने लायक नहीं है।

कोट्स
गांव में पांच ट्यूबवेल हैं। किसी पर भी डोजर नहीं लगा है। डोजर नहीं होने से पानी में क्लोरीन नहीं मिल पाता। इसके अलावा गांव में जन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक एचटूएस किट भी नहीं बांटी है।
विजेंद्र कुमार, सरपंच, गढ़ी सिकंदरपुर

कोट्स
जन स्वास्थ्य विभाग ने गांव में पिछले कई साल से एचटूएस किट नहीं बांटी हैं। किट नहीं मिलने के कारण गांव की पानी की शुद्धता का भी पता नहीं चला पा रहा है। विभाग की घोर लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
राजेश कुमार, सरपंच, महमूदपुर

कोट्स
ज्यादातर ग्रामीणों को एचटूएस किट के बारे में पता ही नहीं है। जब तक किसी चीज का पता ही नहीं चलेगा तो उसका इस्तेमाल कैसे करेंगे। हां कई साल पहले एचटूएस का एक डिब्बा जरूर मिला था। उस डिब्बे में बंद सभी किट की डेट खत्म हो चुकी थी। वह सभी किट मात्र औपचारिकता ही थी।
राजेंद्र सिंह, सरपंच, कचरौली

चार माह में 94 सैंपल फेल
जन स्वास्थ्य विभाग ने पिछले छह माह में पानी के 591 सैंपल लिए। इनमें से बैक्ट्रोलॉजीकल के 94 सैंपल फेल मिले हैं। जून माह में 159 में से 19, जुलाई में 136 में से 26, अगस्त में 150 में से 29 और सितंबर में 146 में से 26 सैंपल फेल मिले। यह सैंपल फेल पाए जाने के बाद भी विभाग ने लोगों को जागरूक करने संबंधी कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं।

वर्जन
एचटूएस किट बांटने संबंधी कोई जानकारी नहीं है। यह कब तक बांटनी थी और कितनी बांटी गई हैं, इसके बारे मेें पता लगाया जाएगा। अभी किसी काम से बाहर हूं। आफिस पहुंचकर ही पता लग पाएगा।
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एसके गर्ग, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत
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