पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में हरियाणा स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित लेखन प्रशिक्षण कार्यशाला में दूसरे दिन शनिवार को लघुकथा एवं कहानी लेखन के बारे में बताया गया। साथ ही प्रशिक्षण सत्रों के दौरान हिंदी काव्य की समृद्ध परंपरा का परिचय देते हुए दोहा, चौपाई, गजल, पद, मुक्तक, कुंडली आदि की जानकारी दी।
एसडी पीजी कॉलेज में कार्यशाला में पानीपत, रोहतक, झज्जर, भिवानी, जींद, कैथल, सोनीपत सहित कुल सात जिलों के महाविद्यालयों के लगभग 150 विद्यार्थी भाग ले रहे है। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ और विद्वानों ने अपनी-अपनी विधाओं के बारे में कार्यशाला के दौरान लेखन उसकी बारीकियों के बारे में बताया। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. रामेश्वर कंबोज वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक सोनीपत के डॉ. लालचंद गुप्त श्मंगल पूर्व प्रोफेसर एवं अधिष्ठाता केयू और डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक गुरुग्राम नेे शिरकत की। सभी सत्रों के दौरान निदेशक डॉ. कुमुद बंसल एसडी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा भी मौजूद रहे। कार्यशाला में केयूके के पूर्व प्रोफेसर डॉ. लालचंद गुप्त मंगल ने कथा साहित्य के अंतर्गत लघुकथा एवं कहानी लेखन के बारे में प्रशिक्षण दिया। डॉ. मंगल ने इन विधाओं की रचना प्रक्रिया और उनके शास्त्रीय विशषेण के बारे में भी बताया।
काव्य विधा का प्रशिक्षण गुरुग्राम के डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल ने दिया। उन्होंने काव्य रचना के प्रमुख घटकों और उसके शिल्प विधान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि उनकी कक्षा में लगभग 40 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपन-अपनी कक्षाओं के अंतर्गत अनुभव के स्रोत श्रेष्ठ रचनाकारों की रचनाओं का अध्ययन, संवेदना को बनाए रखने की चुनौती आदि पर प्रकाश डाला।
निबंध और अन्य गद्य विधाओं में सोनीपत के वरिष्ठ रचानाकार और समालोचक डॉ. रामेश्वर कंबोज ने प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने निबंध, व्यंग्य, जीवनी, आत्मकथा, संचरण रेखाचित्र, रिपोर्ताज विधाओं के बारे में बताया। इस कार्यशाला में पानीपत, सोनीपत, रोहतक भिवानी, जींद एवं कैथल जिलों के महाविद्यालयों से आए लगभग 110 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
दोपहर बाद सायंकालीन सत्र में अभिव्यक्ति सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने समूह चर्चा में भाग लिया। उन्होंने विशेषज्ञों से विभिन्न विधाओें से संबंधित जिज्ञासा के बारे में बताया। अभिव्यक्ति सत्र कि अध्यक्षता डॉ. लाल चंद गुप्त शमंगल और डॉ. रामेश्वर कंबोज ने की। इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ. बाल किशन शर्मा हिंदी विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. आरपी सैनी, डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. सुरेंद्र वर्मा, डॉ. राकेश गर्ग, प्रो. इंदु पूनिया, प्रो. यशोदा अग्रवाल ने भी सक्रिय भागीदारी की।
साहित्य बना देता देवता तुल्य
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि साहित्य न सिर्फ समाज का दर्पण है, बल्कि यह आत्म-मंथन और आत्म-उत्थान का भी माध्यम है। साहित्य हमें देवता तुल्य बना देता है। विचारों को सही दिशा देना और दिखाना ही इस कार्यशाला को मूल मर्म है। उन्होंने हरियाणा साहित्य अकादमी कि निदेशक को उनकी दूरदर्शिता और इस आयोजन को कराने के लिए आभार व्यक्त किया।