पानीपत। सिविल अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी पूरी करने के लिए डिप्लोमा ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स शुरू हो चुका है। अभी गायनॉकॉलोजी का कोर्स शुरू हुआ है। इसमें दो सीट हैं और इन पर दो डॉक्टरों ने दाखिला ले लिया है। इन्हें गायनॉकॉलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. शशिलता प्रशिक्षण दे रही हैं। ये कोर्स तीन साल का होगा, जिसके पूरा होते ही विद्यार्थी को विशेषज्ञ डॉक्टर की उपाधि मिलेगी। इसके बाद ये अस्पताल में विशेषज्ञ के तौर पर काम कर सकेंगे।
गौरतलब है कि सिविल अस्पताल में फिलहाल स्त्री रोग एवं प्रसूति विषय का प्रशिक्षण शुरू हुआ है, क्योंकि सिविल अस्पताल में तीन महिला रोग विशेषज्ञ हैं। धीरे-धीरे अन्य कोर्स भी शुरू होंगे। सिविल अस्पताल में कार्यरत महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका, डॉ. शशिलता और डॉ. मनी ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रहे है। इनको सरकार की ओर से अतिरिक्त भत्ता भी मिलेगा। इस कोर्स का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करना है।
लाइब्रेरी तैयार, किताबें भी आ चुकी हैं-
अस्पताल प्रशासन ने कोर्स के लिए 2.39 लाख रुपये पहले ही जमा करा दिए थे। लाइब्रेरी में किताबें भी आ चुकी है। यह एमडी (डॉक्टर आफ मेडीसिन) एवं एमएस (मास्टर इन सर्जरी) का समकक्ष कोर्स है। सरकारी डॉक्टर की तीन साल की फीस 1.48 लाख लगेगी। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) से पानीपत के अस्पताल को दो सीट मिली है।
अगले सत्र से नेत्र एवं दंत रोग का प्रशिक्षण हो सकता है शुरू
सिविल अस्पताल में तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन एक विशेषज्ञ का अनुभव दो साल का है, इसलिए वे लेक्चर नहीं दे सकते हैं। एक और विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद नेत्र रोग की भी पढ़ाई शुरू हो सकती है। यहां तीन दंत रोग विशेषज्ञ भी हैं। ऐसे में अगले सत्र तक नेत्र के साथ ही दंत रोग से संबंधित कोर्स भी जल्द शुरू हो सकता है।
लैब तैयार होना बाकी
सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए एक लैब बननी है। इसमें एक कैडेवर (महिला की मृत देह) भी होगी। इससे डॉक्टर को शरीर की संरचना और अंदरूनी अंगों की जानकारी मिलेगी। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड की टीम मूल्यांकन कर चुकी है। दाखिला लेने के तीन दिन बाद डीएनबी कोर्स छोड़ता है तो उसकी फीस वापस नहीं की जाएगी।
एमडी-एमएस के समकक्ष डीएनबी कोर्स
सरकारी चिकित्सकों और इतनी ही नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) से भरी जाएंगी। रोहतक पीजीआई सीटें तय करेगा। पहले से पीजी-एमडी का कोर्स कर रहे चिकित्सकों को डीएनबी का लाभ नहीं मिलेगा। डीएनबी तीन साल का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स है। एमबीबीएस के उपरांत इस कोर्स को किया जा सकता है। यह एमडी (डॉक्टर आफ मेडिसिन) व एमएस(मास्टर इन सर्जरी) के समकक्ष है। इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने शुरू किया है।
सिविल अस्पताल में डीएनबी कोर्स शुरू हो चुका है। हमें दो सीटें मिली है। दोनों सीटें भर गई है। डॉ. शशिलता, डॉ. लिपिका व डॉ. मनी इन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।
- डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ, सिविल अस्पताल