संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। दिवाली पर्व का छह दिन का पर्व शनिवार को धनतेरस के साथ शुरू होगा। धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन को बर्तन व चांदी की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। 20 अक्तूबर सोमवार को दिवाली, 22 को गोवर्धन पूजा और 23 को भैयादूज का पर्व मनाया जाएगा। छह दिवसीय पर्व के लिए घर, मंदिर रंग-बिरंगी लाइटों से सजने लगे हैं। बाजारों में ग्राहकों की मांग बढ़ने लगी है। शुभ मुहूर्त में धनतेरस पूजा, दिवाली पर दीपदान किया जाएगा जो शुभ होता है।
प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर के आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि दिवाली पर्व का शुभारंभ धनतेरस शनिवार से होगा। धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस पर 12:30 के बाद खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त रहा। दोपहर बाद खरीदारी करना शुभ होगा। इस दिन बर्तन खरीदना, लक्ष्मी-नारायण पूजन और चांदी खरीदनी शुभ मानी जाती है। धनतेरस पर सायं ही मंदिर में सरसों के तेल से दीप जलाकर रखें जो सुबह तक चले। इससे लक्ष्मी मां प्रसन्न होती हैं और उस घर में प्रवेश करती हैं। इस दिन दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।
दिवाली : दिवाली का पर्व 20 अक्तूबर सोमवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दिन लक्ष्मी नम: इंद्राय नम: कुबेरा नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:07 से 9:02 से रहेगा। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से लक्ष्मी माता प्रसन्न होती हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ब्रह्मपुराण में लिखा है कि दिवाली पर 26 दीपदान का विशेष महत्व है। इसलिए दीपदान करना चाहिए।
गोवर्धन पूजा 22 अक्तूबर बुधवार को की जाएगी। इस दिन भगवान कृष्ण की अन्नकूट पर्व के उपलक्ष्य में पूजा की जाती है। भगवान कृष्ण और गोमाता को 56 प्रकार का भोग लगाया जाता है। गोवर्धन पूजा दिन में किसी भी समय की जा सकती है। पूरा दिन पूजा का शुभ मुहूर्त है। गोमाता की पूजा करने से भगवान कृष्ण की असीम कृप्या प्राप्त होती है।
भैयादूज का पर्व बहन-भाई के लिए विशेष महत्व रखता है। इस साल भैयादूज का पर्व 23 अक्तूबर वीरवार को मनाया जाएगा। भैया दूज की कथा के अनुसार सूर्यदेव की दो संतानें थीं यमराज और यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थी लेकिन यमराज व्यस्तता के कारण उनके घर नहीं जा पाते थे। एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अचानक यमुना के घर पहुंच गए। यमुना ने उनका बहुत आदर-सत्कार किया। भोजन कराया और तिलक लगाया। प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। यमुना ने वरदान मांगा कि यमराज हर साल इस दिन उनके घर आया करें और यमराज ने यमुना को वादा किया। इसलिए इस दिन को भैया दूज के रूप में मनाया जाना शुरू हुआ। इस दिन यमुना में स्नान करने का भी विशेष महत्व है।