पानीपत। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में आयोजित चार दिवसीय हेम टैक्स टेक्सटाइल फेयर में पानीपत में बने बाथरुम मैट, जूट उत्पाद, कुशन कवर, कार्पेट, बेडशीट, पिलो कवर व जूट के थैलों की धूम रही। पानीपत के कंबल, जूट के थैले व कार्पेट को सबसे ज्यादा पसंद किया गया।
स्थानीय कारोबारियों ने यहां चीन को कड़ी टक्कर देते हुए करीब दो अरब रुपये के निर्यात ऑर्डर हासिल किए हैं। शुक्रवार को इस फेयर का समापन हो गया। फेयर में करीब 90 देशों ने अपने-अपने उत्पाद का प्रदर्शन किया। भारत से 1650 उद्यमियों ने भागीदारी की इनमें पानीपत के 158 निर्यातक शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि नए वायरस के कारण चीन से इस बार कम संख्या में निर्यातक इस आयोजन में शामिल पहुंचे थे। पानीपत के निर्यातकों को बांग्लादेश,तुर्किए, पाकिस्तान व वियतनाम से कड़ी चुनौती मिल रही थी। परंतु प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में पानीपत के निर्यातक बेहतर ऑर्डर हासिल करने में सफल रहे। पानीपत के मिंक कंबल को बेहद पंसद किया गया।
सबसे अधिक फायदा कार्पेट कारोबारियों को मिला है। अमेरिका व यूरोप के कारोबारियों की पहली पंसद कार्पेट व कंबल ही रहे। इन ऑर्डरों के मिलने के बाद पानीपत के उद्योग को नई रफ्तार मिलने की आस बढ़ी है। इससे रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
पिछले साल मिले थे 90 करोड़ के ऑर्डर ःपिछले साल पानीपत के कारोबारियों के इस मेले से करीब 90 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले थे। पानीपत के उत्पादों को चीन के उत्पादों पर अधिक तवज्जो मिली थी। यह मेला पिछले दो साल से नियमित लग रहा है। वर्ष 2020, 2021 और 2022 में कोरोना के कारण ये फेयर तीन बार स्थगित हुआ था।
कोरोना के बाद चीन को मिलती है कम तवज्जो ः कोरोना के बाद से इस फेयर में आने वाले कारोबारी चीन में बनी चीजों के पहली पसंद बनाने से परहेज करते हैं। हाल ही में चीन में नया वायरल सामने आने से चीन के उद्यमी परेशान हैं। इसका फायदा पानीपत को हुआ।