कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग द्वारा पंजाबी कविता सिद्धांत और व्यवहार विषय पर एक रूबरू कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. सुहिंदरबीर सिंह ने कहा कि उन्होंने प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिभजन सिंह से प्रेरित होकर कविता की यात्रा शुरू की। कविता स्वयं से स्वयं तक की यात्रा है।
उन्होंने शिव कुमार बटालवी के वस्ता ऐ मेरा मेरे दिलां दया मेहरमा वे जैसे गीतों को याद करते हुए कविता को आत्माभिव्यक्ति का दूसरा नाम बताया। कविता की पहचान संबोधन के आधार पर होती है। कवि का सत्य इतिहास से अधिक विशिष्ट होता है, क्योंकि कवि सामान्य लोगों के सामान्य जीवन को महसूस करता है। विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह ने डॉ. सुहिंदरबीर की साहित्यिक उपलब्धियों के लिए किए गए प्रयासों के बारे में बताया। इस मौके पर डॉ. दविंदर कुमार, सहायक प्रोफेसर डॉ. गुरप्रीत सिंह साहूवाला, सहायक प्रोफेसर डॉ. लता खेड़ा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।