परमा एकादशी पर श्याम बाबा के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु
तीन वर्ष में एक बार आने वाली परमा एकादशी का विशेष महत्व, सुबह तड़के से ही श्याम भक्तों की लगी रही लंबी कतारें
फोटो-4
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा (पानीपत)। ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की परमा एकादशी पर वीरवार को श्री श्याम बाबा चुलकाना धाम में श्रद्धालु उमड़ पड़े। सुबह तड़के से लेकर देर शाम तक श्रद्धालु बाबा के दर्शनों के लिए कतारों में लगे रहे। मंदिर परिसर पूरे दिन जय श्री श्याम के जयकारों से गूंजता रहा।
मंदिर में वीरवार तड़के करीब पांच बजे श्याम बाबा का विशेष फूलों से श्रृंगार किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। सुबह साढ़े पांच बजे से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया, जो दिन चढ़ने के साथ लगातार बढ़ता गया। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालु नंगे पांव बाबा के दर्शनों के लिए पहुंचे। गर्म फर्श के कारण कई श्रद्धालुओं के पैरों में छाले भी पड़ गए, लेकिन उनकी आस्था में कमी नहीं दिखी।
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि परमा एकादशी तीन वर्ष में एक बार आती है और इसे अत्यंत दुर्लभ एवं पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। परमा एकादशी का व्रत करने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। इसे धन, समृद्धि और सुख-शांति प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है।
उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा का भी विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत से पूर्व दशमी तिथि की रात से ही तामसिक भोजन का त्याग करने और एकादशी के दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखने का विधान बताया गया है।
वाटर कूलर खराब मिलने पर कराए ठीक
ग्राम पंचायत के सरपंच सतीश छौक्कर ने बुधवार को मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान मंदिर के गेट नंबर-दो और तीन पर पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं मिली तथा वाटर कूलर खराब पाए गए। सरपंच ने संबंधित लोगों से जानकारी लेकर दोनों वाटर कूलरों को तत्काल ठीक कराया, जिसके बाद श्रद्धालुओं को ठंडे पेयजल की सुविधा मिल सकी।