पानीपत। शहर के साथ जिले में आस्था के साथ सूर्यषष्ठी का महापर्व मनाया जा रहा है। सूर्य उपासना के महापर्व छठ के तीसरे दिन आस्था, उल्लास और समर्पण का अनूठा समन्वय छठ घाटों पर नजर आया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु दोपहर बाद घाट पर पहुंचने लगे। यमुना नदी घाट, दिल्ली पेरलल नहर के असंध रोड, जाटल रोड, एनएफएल घाटों और बाबरपुर रजवाहे पर मंगल गीत गातीं व्रती महिलाओं की आमद देर शाम तक चलती रही। घाटों पर व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने पहुंची। मौसमी फल और प्रसाद से भरे सूपों में जलते दीपक को दोनों हाथों में लेकर व्रतियों ने दूध और जल से अभिषेक किया। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर या पूर्ण होने के बाद घर से दंडवत छठघाट तक पहुंचे। शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बनी हुई थी। व्रतियों की टोली छठ उपासना में तल्लीन दिखीं, जिसमें उनकी कठोर तपस्या के साक्षी व सहयोगी बनने को लालायित परिवार के लोग तत्पर थे। निर्जला व्रत रहकर महिलाओं ने गन्ने के मंडप में गीत गाती छठ मैया की विधिवत पूजा की। इसके बाद महिलाओं ने पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रती वापस वेदिका के सामने पहुंचीं। वेदी के सम्मुख कंद, मूल और फल के साथ ही पूजन के लिए तैयार पकवान रख महिलाओं ने आरती उतारी। प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा। फिर पति के हाथों प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ अलग-अलग इस परंपरा निर्वहन किया। छठव्रतियों ने घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों, समितियों ने घाट और पंडालों में रोशनी की व्यवस्था की थी।
- सूर्यदेव की आराधना में लीन रहा शहर
छठ पर्व पर पूरा शहर सूर्यदेव की आराधना में लीन रहा। दोपहर बाद सड़कों पर घाटों के लिए जाने वालों की काफी भीड़ थी। घर के पुरुष सदस्य कांधे पर गन्ना और सिर पर सूप लेकर आगे चल रहे थे। उनके पीछे व्रती महिलाएं छठ गीत गाते हुए चल रही थीं। इस दौरान परिवार की महिलाएं कांचे ही काठ के बहंगिया... बहंगी लचकत जाय... आदि गीत गा रही थी।
- घाटों पर रहे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
घाटों पर नगर पालिका के अलावा पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की टीमें मुस्तैद रहीं। घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। पर्याप्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे। बड़ी संख्या में महिला पुलिस कर्मी भी सुरक्षा में तैनात नजर आईं। इतना ही नहीं, दिल्ली पेरलल नहर व यमुना नदी में पानी में एक सीमा तक जाने की हिदायत प्रशासन की ओर से दी गई थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों और मोटर बोट की व्यवस्था की गई थी। छठ मेला के दौरान कर्मचारियों के साथ अधिकारियों को भी लगाया गया। पुलिस प्रशासन व अन्य अधिकारी लगातार मुआयना करते रहे।
- उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ होगा व्रत का पारण
तीसरे दिन शाम को बांस की टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्घ्य का सूप सजाया जाता है, जिसके बाद व्रती अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके साथ ही चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
- पूरी तरह से प्रकृति की पूजा है छठ
छठ व्रत पूरी तरह से प्रकृति की पूजा है। इसमें नए फसल, मौसमी फल के साथ नदी, तालाब, पोखर में भगवान सूर्य अर्घ्य दिया जाता है। भगवान सूर्य की उपासना का पर्व छठ आरोग्यता प्रदान करने का व्रत है। इस पर्व को लोग धन, धान्य व सुख समृद्धि की कामना को लेकर करते हैं। ऐसी मान्यता है कि छठ के व्रतियों में सूर्य की वह उर्जा विद्यमान हो जाती है कि व्रती पूरे साल बीमारियों से दूर रहता है। चर्म रोगों में छठ का व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है।